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    रुबियो और जयशंकर की बैठक पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने केंद्र से मांगा जवाब

    नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आगामी भारत दौरे और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली न आने के फैसले को लेकर देश में एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए सवाल खड़ा किया है कि क्या अब अमेरिका भारत की विदेश नीति तय कर रहा है। विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने यह बयान दिया कि अमेरिकी अधिकारी उम्मीद करते हैं कि भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मुंबई में रुबियो से मुलाकात करेंगे। इस पर कांग्रेस ने सख्त रुख अपनाते हुए पूछा कि क्या विदेश मंत्रालय ने अपने ही मंत्री के कार्यक्रमों का ऐलान करने का जिम्मा दूसरों को सौंप दिया है?

    विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण और दौरे की रूपरेखा

    बढ़ते विवाद के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 20 अक्टूबर को मुंबई में मार्को रुबियो के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इसके साथ ही दोनों नेता अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) के तौर पर शामिल होंगे। बैठक के स्थान को लेकर उठ रहे सवालों पर विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में कई मौकों पर दिल्ली से बाहर के प्रमुख शहरों में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों की भव्य अगवानी की है।

    मुंबई और जामनगर का दौरा करेंगे रुबियो

    महज छह महीने के भीतर दूसरी बार भारत आ रहे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह दौरा विशेष रूप से व्यापारिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है। अपने यात्रा कार्यक्रम के तहत वे मुंबई के अलावा गुजरात के जामनगर का भी दौरा करेंगे, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज की विशाल रिफाइनरी स्थित है। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिलायंस के सहयोग से टेक्सस में 300 बिलियन डॉलर की विशाल रिफाइनरी परियोजना स्थापित करने का ऐलान किया था।

    क्या है विवाद की मुख्य वजह?

    मार्को रुबियो की भारत यात्रा की आधिकारिक घोषणा सबसे पहले अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) द्वारा की गई थी, जिसमें बताया गया था कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। विवाद की मुख्य वजह तब बनी जब रुबियो और जयशंकर की मुलाकात की घोषणा मेजबान देश भारत के बजाय गुरुवार को एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने की। सामान्यतः इस प्रकार की उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों और कार्यक्रमों का ऐलान पहले मेजबान देश द्वारा ही किया जाता है। सर्जियो गोर के इस बयान और रुबियो के दिल्ली न जाने के फैसले को लेकर कांग्रेस अब सरकार की कूटनीतिक नीति पर सवाल उठा रही है।

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