विकास और न्याय की दोहरी पहल से जगी उम्मीद, किशनगढ़बास में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना अनूठा प्रयास
किशनगढ़बास। इस बार नवरात्रि, दशहरा और दीपावली का अद्भुत संयोग सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किशनगढ़बास नगर पालिका में भी एक शुभ संयोग बन गया है। जब शहर में माता के नवरात्रे चल रहे थे, तब अध्यक्ष की कुर्सी पर विश्वास बैठा और पहले से ही ईओ की कुर्सी पर पूजा शर्मा नियुक्त हैं। एक तरफ विकास की कुर्सी पर विश्वास यादव डब्बू हैं तो दूसरी तरफ न्याय की कुर्सी पर पूजा शर्मा है। नगर पालिका में इन दो कुर्सियों से संदेश साफ है अब शहर में विकास और न्याय दोनों की गारंटी है।

राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि जब कुर्सी बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष काम करने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि शहर बदलाव की ओर है। किशनगढ़बास में यही बदलाव अब जमीन पर दिख रहा है।आमतौर पर सत्ता आते ही पहला निशाना विरोधी होते हैं और पहला बचाव अपनों का होता है। लेकिन नए अध्यक्ष विश्वास यादव डब्बू ने इस परिपाटी को तोड़ दिया। उन्होंने अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत अपने ही वार्ड से की और पहली कार्रवाई अपने सबसे खास लोगों के अवैध निर्माण पर की। एक होटल सहित कई पक्के चबूतरों पर खुद खड़े होकर पीला पंजा चलवाया।
यह सिर्फ कार्रवाई नहीं, एक राजनीतिक संदेश था कि कानून सबके लिए बराबर है। यही कारण है कि आज हर व्यक्ति की जुबान पर इस कार्रवाई की चर्चा है। जब मुखिया ने ही अपने लोगों को नहीं बख्शा, तो नीचे के अधिकारियों और सिफारिशी नेताओं की हिम्मत खुद-ब-खुद टूट गई। यही सुशासन की पहली सीढ़ी है।
लोगों का कहना है कि इस शहर ने बहुत से नेता देखे, बहुत से वादे सुने, लेकिन पहली बार शहर को अपने दर्द को समझने वाला सेवक मिला है। वह युवा है, पढ़ा-लिखा है, वकील है, कानून की समझ रखता है और 15 साल के राजनीतिक अनुभव ने युवाओं में उसकी गहरी पैठ बना दी है।

चुनाव से पहले हर गली-मोहल्ले में एक ही चर्चा थी इस बार चेयरमैन तो डब्बू ही बनेगा। और हुआ भी वही। उसके वार्ड में कोई चुनाव लड़ने को तैयार ही नहीं हुआ, विपक्षी पार्टी को प्रत्याशी तक नहीं मिला। यह वार्ड की जनता का दिया हुआ निर्विरोध आशीर्वाद था, जो उसे सीधे अध्यक्ष की कुर्सी तक ले गया।
विश्वास यादव आज उसी आशीर्वाद को बिना किसी भेदभाव के लौटा रहे है। शहर की सबसे बड़ी समस्या तोप सर्किल से खैरथल रोड, अलवर व तिजारा रोड, बासड़ा रोड और गंज रोड का अतिक्रमण है, जो यातायात के साथ-साथ जल निकासी की सबसे जटिल समस्या बना हुआ है।
अध्यक्ष ने अपने ही खास लोगों के निर्माण तुड़वाकर बता दिया कि उसके लिए शहर पहले है, संबंध बाद में। आज आम आदमी की जुबान पर एक ही बात है “जब अपनों को नहीं बख्शा तो हम तो खुद ही अतिक्रमण हटा लेंगे।” यह डर नहीं, यह भरोसा है। और भरोसे से ही शहर बनते हैं।
त्योहारों के इस शुभ संयोग में अगर इसी रफ्तार से बिना भेदभाव के पीला पंजा चलता रहा, तो इस दीपावली पर किशनगढ़बास सच में जगमगाएगा। क्योंकि अतिक्रमण मुक्त सड़कें ही विकास की पहली गारंटी हैं, और इस गारंटी की शुरुआत विश्वास ने कर दी है, जिसमें पूजा की पवित्रता का साथ मिल गया है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

