इंदौर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का हिंदुत्व को लेकर दिया गया बयान एक बार फिर सियासी गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इंदौर में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि हिंदुत्व का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है और इसके प्रचार-प्रसार से समाज में कटुता बढ़ती है।
वेदों-पुराणों में नहीं है हिंदुत्व का जिक्र
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'हिंदुत्व' शब्द का उल्लेख प्राचीन वेदों और पुराणों में कहीं नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि सावरकर द्वारा वर्ष 1930 के आसपास इस शब्द को आगे बढ़ाया गया था, और यह आम हिंदुओं की वास्तविक पहचान नहीं है। धर्म से इसका कोई वास्ता नहीं है। सिंह ने आरोप लगाया कि एक ओर जहां हिंदुओं का कट्टरपंथी समूह सक्रिय है, तो वहीं दूसरी ओर एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता हैं, जिन्होंने मिलकर समाज के घर-घर में वैमनस्यता और दूरियां फैलाई हैं। इससे पहले भी वह हिंदू और सनातन शब्द को लेकर अपनी टिप्पणियां दे चुके हैं, जिस पर साधु-संतों की ओर से तीखा विरोध जताया गया था।
20 अक्टूबर से शुरू होने वाली 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा'
दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह आगामी 20 अक्टूबर यानी विजयादशमी के पावन अवसर पर उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 950 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं। 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' के नाम से होने वाली इस लंबी पैदल यात्रा से ठीक पहले उनके इस बयान को हिंदू मान्यताओं और सनातन परंपराओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में गर्माहट आ गई है।


