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    यस बैंक AT-1 बॉन्ड विवाद के बाद दो म्यूचुअल फंड ने निवेश पर लगाई रोक

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यस बैंक के अतिरिक्त टियर-1 (एटी-1) बॉन्ड को बहाल करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद, कोटक महिंद्रा एएमसी और निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट ने एहतियात बरतते हुए अपनी कुछ डेट म्युचुअल फंड योजनाओं में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। फंड हाउसों का यह कदम निवेशकों के हितों की सुरक्षा और पुरानी एनएवी में अचानक होने वाली संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि नए निवेशकों के आने से पुराने निवेशकों के लाभ पर कोई असर न पड़े।

    फंड हाउसों द्वारा उठाए गए कदम

    सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसमें यस बैंक के इन बॉन्डों को बट्टे खाते में (राइट-ऑफ) डालने के फैसले को रद्द कर दिया गया था। इस अदालती आदेश से उन म्युचुअल फंड योजनाओं की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिनके पास ये बॉन्ड मौजूद थे और जिनका मूल्यांकन अब तक शून्य माना जा रहा था।

    • कोटक महिंद्रा एएमसी: कंपनी ने अपने 'कोटक मीडियम टर्म फंड' और 'कोटक क्रेडिट रिस्क फंड' में नए निवेश पर रोक लगा दी है। इन दोनों फंडों के पास कुल मिलाकर करीब 2,680 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां हैं।

    • निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट: इस फंड हाउस ने भी अपने 'इंडिया रिटायरमेंट फंड' की वेल्थ क्रिएशन और इनकम जेनरेशन योजनाओं में नए पैसे का निवेश फिलहाल बंद कर दिया है।

    फंड हाउसों का उद्देश्य और विशेषज्ञों की राय

    फंड प्रबंधन कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि यह एक एहतियाती कदम है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अचानक बढ़ने वाली एनएवी का लाभ वे नए निवेशक न उठा सकें जिन्होंने इस फैसले के बाद एंट्री ली है, और इसका पूरा फायदा केवल उन पुराने निवेशकों को मिले जो लंबे समय से इस जोखिम के साथ बने हुए थे। फिलहाल दोनों ही फंड हाउस सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं और इन बॉन्डों के सटीक मूल्यांकन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि मार्च 2020 में यस बैंक के संकट और पुनर्गठन के दौरान 8,415 करोड़ रुपये मूल्य के इन एटी-1 बॉन्डों को पूरी तरह समाप्त मान लिया गया था। हालांकि, जनवरी 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगाई थी और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे सही ठहराया है। फिक्स्डआईक्यू डॉट कॉम के संस्थापक सुरेश दरक के अनुसार, इस अदालती फैसले के बाद अब बॉन्डधारकों को उनका मूलधन और उस पर मिलने वाले ब्याज का बड़ा वित्तीय लाभ मिलने की पूरी संभावना बन गई है।

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