तालवृक्ष और अकबरपुर क्षेत्र में दर्ज हुई शावकों की पहली तस्वीरें, सरिस्का में बाघों की आबादी को मिली मजबूती; वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई
अलवर। सरिस्का बाघ परियोजना में बाघिन एसटी-26 पहली बार अपने दो शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में दिखाई दी है। वन विभाग के कैमरा ट्रैप में दोनों शावकों की तस्वीरें दर्ज होने के बाद वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विभाग के अनुसार, दोनों शावक तस्वीरों में स्वस्थ और सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
बाघिन एसटी-26 का पहला प्रसव
सरिस्का बाघ परियोजना के उप वन संरक्षक अभिमन्यु सहारण ने बताया कि लगभग 6 से 7 वर्ष की बाघिन एसटी-26 का यह पहला प्रसव है। एसटी-26 बाघिन एसटी-14 की संतान है। इसका विचरण क्षेत्र तालवृक्ष और अकबरपुर वन क्षेत्र में है।
उन्होंने बताया कि सरिस्का में जन्मी बाघिन द्वारा सफल प्रजनन किए जाने से बाघ परियोजना में बाघों की आबादी को और मजबूती मिली है। कैमरा ट्रैप में दोनों शावकों की मौजूदगी दर्ज होना वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण जानकारी है।
शावकों की सुरक्षा के लिए बढ़ाई निगरानी
उप वन संरक्षक ने संबंधित वन क्षेत्र के कर्मचारियों को कैमरा ट्रैप के माध्यम से नियमित निगरानी करने और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।
उन्होंने क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप और अन्य व्यवधानों को न्यूनतम रखने के भी निर्देश दिए, ताकि बाघिन और शावकों को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण मिल सके।
वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की अपील
वन विभाग के अनुसार, सरिस्का क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
विभाग ने आमजन से अपील की है कि वन्यजीवों से उचित दूरी बनाए रखें और पर्यटन संबंधी नियमों का पालन करें। गांवों के आसपास बाघ की गतिविधि दिखाई देने पर इसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन कार्यालय को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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