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    अब कैमरा स्क्रीन पर नजरें गड़ाने की जरूरत नहीं! बालोतरा के युवाओं ने बनाया AI फॉर्मूला

    बालोतरा। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात जवानों की चौकसी और सीमा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में बालोतरा जिले के दो होनहार युवाओं ने एक बड़ा तकनीकी नवाचार किया है। आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी जयपुर में अध्ययनरत बचपन के दो दोस्तों कृष चारण भांडियावास और गौरव वैष्णव आसोतरा ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक ऐसा अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर मॉडल तैयार किया है, जो सीमा पर लगे साधारण सीसीटीवी कैमरों को 'स्मार्ट कैमरों' में तब्दील कर देगा। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी भी तरह के नए या महंगे संसाधनों को खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों छात्रों के इस उत्कृष्ट शोधपत्र का चयन तुर्की में आयोजित होने जा रहे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आईईईई सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए किया गया है।

    स्मार्ट निगरानी तकनीक और बिना इंटरनेट काम करने की क्षमता

    छात्रों द्वारा विकसित इस विशेष सॉफ्टवेयर मॉडल को 'आईबीवीएपी' (इंटेलिजेंट बॉर्डर वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म) का नाम दिया गया है। आमतौर पर सीमावर्ती इलाकों में लगे कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग का काम करते हैं, जिससे सुरक्षा बलों के जवानों को स्क्रीन पर लगातार नजर टिकाए रखनी पड़ती है। हालांकि, यह नया एआई मॉडल कैमरों से मिलने वाली फुटेज का रियल-टाइम में विश्लेषण कर संदिग्ध चेहरों की पहचान करने, वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने और किसी भी अवांछित गतिविधि को तुरंत पकड़ने में सक्षम है। जैसे ही सीमा पर कोई संदिग्ध गतिविधि होगी, यह प्रणाली तुरंत सुरक्षा बलों को सतर्क कर देगी। इस तकनीक की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे संचालित करने के लिए इंटरनेट या क्लाउड नेटवर्क की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती, जिससे संवेदनशील और गोपनीय सैन्य जानकारियों के लीक होने का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

    बचपन की दोस्ती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी सफलता

    वर्तमान में एमसीए के छात्र कृष चारण और कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रहे गौरव वैष्णव ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के कठिन मानसिक तनाव को कम करना था। इस नवाचार को लेकर तुर्की के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आईईईई हैक रिसर्च कॉन्फ्रेंस में शोधपत्र का चयनित होना दोनों के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि है। हाल ही में आईईईई स्किट द्वारा आयोजित 'इग्नाइट हैकाथॉन' प्रतियोगिता में भी इस सॉफ्टवेयर मॉडल को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, जहाँ दोनों छात्रों को 35 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

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