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    भागवत के बयान से संघ और BJP के बीच खटास खत्म होने की चर्चा, यूपी चुनाव पर निगाहें

    नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस बार विजयादशमी के पावन अवसर पर नागपुर से देश को एक बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। अपने संबोधन के दौरान भागवत ने फ्रांस, इटली से लेकर इंडोनेशिया और पड़ोसी देशों में जारी उथल-पुथल का जिक्र करते हुए देश को आगाह किया कि दुनिया में एक बड़ा तूफान आ रहा है, जिसका असली निशाना भारत है। उन्होंने 'रिजीम चेंज' (सत्ता परिवर्तन) की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केवल सरकारें बदलने से व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं। इस दौरान उन्होंने पश्चिम से उठ रही उस सांस्कृतिक लहर पर भी तीखा प्रहार किया जो शालीनता और संस्कारों को समाप्त करना चाहती है, और संकट के इस दौर में केंद्र सरकार के कई कदमों का समर्थन करते नजर आए।

    संघ और बीजेपी के बीच के रिश्ते और वैचारिक एकजुटता

    हालांकि राजनीतिक गलियारों में अक्सर संघ और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर तल्खियों और असहमतियों की चर्चाएं आम रहती हैं, लेकिन वैश्विक विरोध प्रदर्शनों और देश की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर संघ पूरी तरह सरकार के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 के आम चुनाव के दौरान दोनों संगठनों के बीच आए कुछ वैचारिक गतिरोधों और बयानों के बाद अब संघ का रुख धीरे-धीरे काफी नरम पड़ता नजर आ रहा है। भागवत ने अपने संबोधन में जहां एक तरफ नेताओं से जनता के भरोसे को बनाए रखने की बात कही, वहीं आने वाले विधानसभा चुनावों और देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से पूरी तरह एकजुट होने का कड़ा संकेत भी दे दिया है।

    संत रविदास और राजनारायण बसु के विचारों का स्मरण

    अपने इस महत्वपूर्ण भाषण के दौरान आरएसएस प्रमुख ने देश के महान विचारकों और संतों के योगदान को भी शिद्दत से याद किया। उन्होंने बंगाल के प्रख्यात विचारक राजनारायण बसु की जन्मशती के दो सौ वर्ष पूरे होने पर उनके द्वारा समाज में सांस्कृतिक चेतना जगाने के लिए शुरू किए गए 'हिंदू मेले' और स्वदेशी मेलों की पहल को रेखांकित किया। इसके साथ ही, उन्होंने संत रविदास के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि जब देश पर विदेशी आक्रमण हो रहे थे और समाज में भय का वातावरण था, तब संत रविदास ने लोगों को भेदभाव मिटाकर अपने धर्म और संस्कृति पर मजबूती से टिके रहने का अनमोल मार्ग दिखाया था।

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