मानकी क्रेशर की ओर मुड़ते समय हुआ हादसा, तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया; पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर डंपर किया जब्त
नौगांवा। रामगढ़ थाना क्षेत्र के बीजवा में गुरुवार शाम एक बार फिर डंपर हादसे में एक परिवार उजड़ गया। मानकी क्रेशर की ओर मुड़ रहे डंपर की चपेट में आने से बाइक सवार कृष्ण चंद शर्मा (46) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के दौरान डंपर का अगला पहिया उनके ऊपर चढ़ गया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। एक ही स्थान पर बार-बार हो रहे हादसों ने भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पगड़ी रस्म से लौटते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक कृष्ण चंद शर्मा पुत्र खेमचंद शर्मा बुआका निवासी थे। वे नौगांवा निवासी अपने जीजा हेमंत जांगिड़ के भाई नरेंद्र जांगिड़ की पगड़ी रस्म में शामिल होने के बाद बाइक से अपने घर लौट रहे थे। बाइक और डंपर दोनों नौगांवा से रामगढ़ की तरफ जा रहे थे।
बीजवा से मानकी की ओर जाने वाले रास्ते पर डंपर को मानकी क्रेशर की तरफ मुड़ना था। इसी दौरान मोड़ पर डंपर का अगला पहिया बाइक सवार के ऊपर चढ़ गया। गंभीर चोटों के कारण कृष्ण चंद ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
उसी मोड़ पर पहले भी हुई थी किशोर की मौत
बीजवा के इसी स्थान पर 12 जुलाई को भी जानलेवा हादसा हुआ था। उस समय मंडापुर निवासी 17 वर्षीय दिलजीत सिंह पुत्र राजा सिंह डंपर की चपेट में आ गया था। उस हादसे के बाद चालक के मौके से फरार होने की बात सामने आई थी।
अब इसी मोड़ पर एक और व्यक्ति की जान चली गई। लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय सड़क सुरक्षा व्यवस्था, मोड़ पर सावधानियों और भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
पंचायत चुनाव के चलते पुलिस टीम घटनास्थल के पास ही मौजूद थी। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और घायल कृष्ण चंद को रामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकीय प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने डंपर चालक को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की ओर से की जा रही है।
परिवार में अकेले कमाने वाले थे कृष्ण चंद
कृष्ण चंद बुआका में आरा मशीन का काम करते थे। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां हैं। बताया गया है कि वे परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के साथ ही परिवार के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है।
आखिर कब सुरक्षित होगा बीजवा का यह मोड़?
एक ही स्थान पर दो जानलेवा हादसे होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजवा के इस मोड़ पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। क्या भारी वाहनों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने, मोड़ पर चेतावनी संकेत लगाने और अन्य जरूरी सुरक्षा उपायों की व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए यह हादसा सड़क सुरक्षा की समीक्षा करने का गंभीर अवसर है।
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