जयपुर। जयपुर शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन (जयपुर जंक्शन) पर लगातार बढ़ रहे यात्रीभार के दबाव को कम करने के लिए विकसित किया गया खातीपुरा रेलवे स्टेशन अब एक सशक्त विकल्प के रूप में उभर रहा है। यहां से ट्रेनों का संचालन बढ़ने के साथ ही दूसरे राज्यों के लिए सीधी और सुगम रेल कनेक्टिविटी का दायरा भी लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले डेढ़ साल के भीतर इस स्टेशन पर ट्रेनों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 28 तक पहुंच चुकी है, जिसमें इसी साल जून में शुरू की गई दरभंगा अमृत भारत ट्रेन भी शामिल है।
खातीपुरा-संतरागाछी ट्रेन को रेलमंत्री दिखाएंगे हरी झंडी
खातीपुरा स्टेशन के विस्तार की कड़ी में सोमवार को खातीपुरा-संतरागाछी ट्रेन की शुरुआत होने जा रही है, जिसे रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। महज चार महीने के भीतर मिलने वाली यह दूसरी नई ट्रेन जयपुर के एक प्रमुख वैकल्पिक रेल टर्मिनल के रूप में खातीपुरा की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करेगी। उद्घाटन के दिन विशेष सेवा के रूप में चलने के बाद इसका नियमित साप्ताहिक संचालन किया जाएगा। यह ट्रेन टाटानगर, रांची, टोरी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज और कानपुर जैसे देश के प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी।
त्योहारी सीजन में पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर के यात्रियों को राहत
वर्तमान में हावड़ा सुपरफास्ट और सियालदह एक्सप्रेस में लंबी वेटिंग लिस्ट के चलते यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संतरागाछी के लिए नई साप्ताहिक ट्रेन शुरू होने से पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड जाने वाले यात्रियों को एक सुविधाजनक अतिरिक्त विकल्प मिल जाएगा। इसके अलावा, त्योहारी सीजन में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 29 अक्टूबर से 26 नवंबर तक खातीपुरा-कामाख्या वीकली स्पेशल ट्रेन की 5 ट्रिप चलाने का भी निर्णय लिया है, जिससे असम और बंगाल तक सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
बढ़ा यात्रीभार और राजस्व, लेकिन आगे ये हैं चुनौतियां
खातीपुरा स्टेशन से वर्तमान में हिसार, सीकर, बठिंडा, यशवंतपुर, अजमेर, भोपाल, हावड़ा और कामाख्या सहित कई प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें संचालित हो रही हैं। स्टेशन पर अब औसतन 2,127 दैनिक यात्री पहुंच रहे हैं, जिससे प्रतिदिन औसतन 4.90 लाख रुपये का राजस्व मिल रहा है। हालांकि, जयपुर जंक्शन का पूर्ण और सहज विकल्प बनने के लिए यहां से नियमित ट्रेनों के दीर्घकालिक विस्तार के साथ-साथ यात्रियों की सुविधा के अनुरूप आंतरिक संचालन और पहुंच मार्ग की व्यवस्थाओं को और अधिक उन्नत बनाने की चुनौती अभी बनी हुई है।


