उज्जैन। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के मद्देनजर उज्जैन में विकास कार्यों और तैयारियों का सिलसिला तेजी से चल रहा है। शहर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश करते ही अलौकिक और दिव्य कुंभ नगरी का अहसास कराने के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) की ओर से 9 भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लगभग 92.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन सभी द्वारों को 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से शुरुआती दो द्वारों का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
तीन चरणों में होगा 9 भव्य द्वारों का निर्माण
उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। पहले चरण के तहत विक्रमादित्य द्वार, त्रिशूल द्वार और डमरू द्वार का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में पंचजन्य द्वार, गज द्वार और अमृत द्वार बनाए जाएंगे। वहीं, तीसरे और अंतिम चरण में उज्जैनी द्वार, काल गणना द्वार और सिंहस्थ द्वार का निर्माण पूरा किया जाएगा।
सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक पत्थरों का होगा उपयोग
यह सभी नए प्रवेश द्वार सिंहस्थ की संस्कृति, सनातन परंपरा तथा उज्जैन के गौरवशाली इतिहास को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए हैं। इनके निर्माण में गुलाबी, पीले और सफेद पत्थरों का उपयोग किया जाएगा। विशेष रूप से जैसलमेर और बंसी पहाड़पुर के पत्थरों पर कलात्मक नक्काशी कर इन द्वारों पर विभिन्न पौराणिक और सांस्कृतिक आकृतियों को उकेरा जाएगा, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को उज्जैन की समृद्ध विरासत की गहरी जानकारी मिल सके।
पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी
इस पूरे प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारी देते हुए UDA अध्यक्ष रवि सोलंकी ने बताया कि इन द्वारों का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक दिव्य अनुभव कराना है। निर्माण कार्य पूरा करने वाली एजेंसी को ही अगले 5 साल तक इन सभी द्वारों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। कार्यादेश जारी होने की तारीख से अगले डेढ़ साल (18 महीने) के भीतर इस पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की तैयारी है।


