वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तकनीक की बढ़ती भूमिका के बीच एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट संचार प्रणाली 'स्टारशील्ड' को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या किसी निजी कारोबारी के व्यक्तिगत फैसलों से किसी देश की पूरी सैन्य रणनीति और युद्ध संचालन प्रभावित हो सकता है।
यूक्रेन के ड्रोन अभियानों पर पड़ा असर
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, एलन मस्क ने व्यक्तिगत रूप से स्टारशील्ड की सेवाओं की गति को सीमित करने का निर्देश दिया था, जिसका सीधा असर यूक्रेन के ड्रोन अभियानों पर पड़ा। अमेरिकी अधिकारियों और इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि इन प्रतिबंधों के कारण यूक्रेन के हमलावर और हवाई रक्षा ड्रोन अभियानों में भारी रुकावटें आईं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी पुष्टि की थी कि मोर्चे के कुछ क्षेत्रों में 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाले उपकरणों के संचालन में संचार संबंधी गंभीर समस्याएं आईं, जिससे सैनिकों तक रसद पहुंचाने और मध्यम दूरी के हमलावर ड्रोन्स तथा रूसी ड्रोन्स को रोकने वाले इंटरसेप्टर के इस्तेमाल पर असर पड़ा।
डोनाल्ड ट्रंप और मस्क के बीच चर्चा, ओलिगार्की पर बहस तेज
इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के बीच फोन पर बातचीत हुई है, हालांकि इससे पहले भी दोनों इस मुद्दे पर चर्चा कर चुके हैं। दूसरी ओर, मस्क का तर्क है कि स्टारशील्ड की गति से जुड़ा कोई भी बदलाव अमेरिकी सरकार का निर्णय है और यह प्रणाली पूरी तरह से अमेरिकी सरकार के नियंत्रण तथा प्रबंधन के तहत संचालित होती है। इस पूरी घटना ने अमेरिका में 'ओलिगार्की' यानी कुछ चुनिंदा बेहद अमीर और शक्तिशाली लोगों के हाथों में असाधारण प्रभाव केंद्रित होने की बहस को फिर से हवा दे दी है।
अरबपतियों की बढ़ती ताकत और जवाबदेही का सवाल
अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स सहित कई प्रमुख नेताओं ने देश के अरबपतियों की बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक ताकत पर गहरी चिंता जताई है। जानकारों का मानना है कि मस्क के मामले में सवाल केवल उनकी अकूत संपत्ति का नहीं है, बल्कि उस नाज़ुक तकनीक पर उनके नियंत्रण का है जिस पर युद्ध के समय कोई राष्ट्र अपनी सेना की सफलता के लिए निर्भर रहता है। जब सैन्य अभियान और राष्ट्रीय संचार व्यवस्था जैसी चीजें निजी कंपनियों की तकनीक पर आश्रित होने लगें, तो वैश्विक स्तर पर कॉरपोरेट जवाबदेही का सवाल सबसे अहम बन जाता है।


