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    Homeराज्यछत्तीसगढ़युक्तियुक्तिकरण से सशक्त हो रही शिक्षा व्यवस्था, बढ़ रही बच्चों की उपस्थिति

    युक्तियुक्तिकरण से सशक्त हो रही शिक्षा व्यवस्था, बढ़ रही बच्चों की उपस्थिति

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लागू की गई युक्तियुक्तिकरण नीति अब विद्यालयों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। वर्षों से शिक्षकविहीन रहे प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अब नियमित शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही बच्चों की उपस्थिति में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

    बलरामपुर जिले में इस नीति के अंतर्गत कुल 14 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। वाड्रफनगर विकासखंड के माध्यमिक शाला जरहाटोला और प्राथमिक शाला टोलकुपारा में शिक्षकों की नियुक्ति के बाद स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां जरहाटोला स्कूल में केवल 5 छात्र पंजीबद्ध थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 56 तक पहुँच चुकी है। इसी तरह टोलकुपारा में भी बच्चों की उपस्थिति में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है। गांव के पारा-मोहल्लों से अब बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुँच रहे हैं और समय पर स्कूल खुलने से ग्रामीणों का शासकीय स्कूलों पर विश्वास फिर से लौटने लगा है। स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति से बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है और वे पहले से अधिक उत्साह और मनोयोग से पढ़ाई में जुट गए हैं।

    जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि युक्तियुक्तिकरण नीति के तहत स्कूलों में अतिशेष शिक्षकों का समायोजन कर शिक्षकविहीन विद्यालयों को प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था में स्थायित्व आया है और अब विषय विशेषज्ञ शिक्षक कक्षा संचालन कर रहे हैं। पहले जहां एकल शिक्षक को सभी विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी, वहीं अब विषयवार शिक्षकों के आने से विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन मिल रहा है। विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं, जिससे विद्यार्थियों की समझ में वृद्धि हो रही है और भविष्य में बेहतर परीक्षा परिणाम की आशा की जा रही है। शिक्षकगण भी पूरे समर्पण भाव से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

    युक्तियुक्तिकरण शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचार के रूप में सामने आया है, जिसने न केवल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को संभव बनाया है, बल्कि ग्रामीण अंचलों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। यह पहल शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ ही विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।

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