हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. सालभर में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिनमें हर महीने दो बार भगवान विष्णु की आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. वहीं कार्तिक माह को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना गया है. इस माह की पहली एकादशी का भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है. इस तिथि पर भगवान विष्णु की भक्ति भाव से आराधना की जाती है और विष्णु जी की पूजा के साथ ही देवी मां लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है, जिससे भक्त एक साथ दोनों की कृपा पाते हैं. जीवन में हर एक भौतिक सुखों की प्राप्ति से लेकर जीवन के बाद मोक्ष की प्राप्ति के लिए रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि रमा एकादशी की सही तिथि और पूजन के नियम क्या है.
कब मनाई जाएगी रमा एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 4 नवंबर, दिन बुधवार को सुबह में 11 बजकर 3 मिनट से शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 5 नवंबर दिन गुरुवार को सुबह में 10 बजकर 35 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर रमा एकादशी 5 नवंबर, दिन गुरुवार को है. वहीं व्रत का पारण 6 नवंबर को द्वादशी तिथि में किया जाएगा.
एकादशी व्रत जरूर करें ये कार्य
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए क्योंकि पीला रंग भगवान श्रीहरि का प्रिय रंग माना जाता है. भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें. इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
एकादशी के दिन इन नियमों का भी करें पालन
एकादशी के दिन गलती से भी चावल का सेवन न करें. इसके साथ ही एकादशी व्रत के दिन मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए. एकादशी व्रत रख रहे हैं, तो झूठ बोलने से बचें और किसी के लिए अपशब्द का प्रयोग न करें. एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित माना गया है, तो पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी तोड़कर रख लें.


