नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के पूर्वी जिले में वकीलों के कथित दबाव के चलते एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और एक निरीक्षक (इंस्पेक्टर) का निष्क्रिय इकाइयों में अचानक तबादला किए जाने के विरोध में दिल्ली पुलिस के सैकड़ों जवान पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए। आक्रोशित पुलिसकर्मियों का स्पष्ट रूप से कहना था कि उच्च अधिकारियों द्वारा बिना निष्पक्ष जांच के इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है, जिससे संपूर्ण पुलिस बल का मनोबल गंभीर रूप से आहत होता है।
तीस हजारी घटना के बाद दूसरा बड़ा पुलिसिया विरोध प्रदर्शन
चर्चित तीस हजारी अदालत परिसर के भीतर घटित हुई पुरानी हिंसा की घटना के उपरांत यह दूसरा ऐसा अवसर है जब दिल्ली पुलिस के अनुशासित जवानों को अपने आंतरिक सम्मान, सुरक्षा और पेशेवर अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरकर सीधे तौर पर पुलिस मुख्यालय का घेराव करना पड़ा है। इस अभूतपूर्व और अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे के भीतर उच्च स्तर पर हड़कंप मच गया और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई।
मुख्यालय के बाहर भारी सुरक्षा और जवानों की प्रमुख मांगें
इस अचानक हुए प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस मुख्यालय के चारों ओर और उसके आसपास के परिसरों में भारी तादाद में अतिरिक्त सुरक्षा बल तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। प्रदर्शन में शामिल पुलिस जवानों ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कर्तव्य पथ पर तैनात पुलिसकर्मियों के विरुद्ध वकीलों के दबाव में आकर की जाने वाली दंडात्मक और पक्षपातपूर्ण कार्यवाहियों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए ताकि पुलिसकर्मी बिना किसी भय या मानसिक दबाव के अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।


