इन दिनों देहरादून के बाजारों में कौड़ी बिक रही है, जो कभी पैसे की जगह इस्तेमाल होती थी. इतिहास में कौड़ी को दुनिया की सबसे पुरानी मुद्राओं में से एक माना जाता है. भारत में मुगल काल से पहले और कई अफ्रीकी और एशियाई देशों में 18वीं सदी तक कौड़ी ही मुख्य मुद्रा थी. इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए दिवाली पर इसे खरीदना शुभ और धन को आकर्षित करने वाला माना जाता है. पूजा घर और तिजोरी में रखने के लिए लोग आज भी इसे काफी मांग रहे हैं.
देहरादून के ज्योतिषाचार्य संजय ने बताया कि जब वस्तुओं के विनिमय के लिए मुद्रा की जरूरत हुई, तब कौड़ी का उपयोग किया जाने लगा. उन्होंने कहा कि यह सबसे पहले चलने वाली मुद्रा है. इतिहास में कौड़ी को दुनिया की सबसे पुरानी मुद्राओं में से एक माना जाता है. भारत में मुगल काल से पहले और कई अफ्रीकी व एशियाई देशों में 18वीं सदी तक कौड़ी ही मुख्य मुद्रा थी.
फूटी कौड़ी से लेकर आने तक ऐसा था हिसाब
उन्होंने कहा कि आपने सुना होगा कि मेरे काम के बदले फूटी कौड़ी नहीं मिली. इसके इतिहास को देखें तो तीन फूटी कौड़ी एक कौड़ी के बराबर होती थी. इसके बाद 10 कौड़ी एक दमड़ी के बराबर होती थी. दो दमड़ी एक धेले के बराबर होती थी, एक धेला डेढ़ पाई के बराबर और 3 पाई का एक पैसा होता था. चार पैसे का एक आना होता था.
सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक
इन दिनों देहरादून के बाजारों में कौड़ी बिक रही है, जो कभी पैसे की जगह इस्तेमाल होती थी. इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए दिवाली पर इसे खरीदना शुभ और धन को आकर्षित करने वाला माना जाता है. उन्होंने कहा कि दिवाली पर इसका बहुत महत्व होता है. घर की नींव में इसका उपयोग होता है. छोटे बच्चे की कमर में इसको टांगा जाता है, ताकि उसे नजर न लगे. यह संपन्नता और सकारात्मकता लेकर आता है. लोग इसे तिजोरी में भी रखते हैं. इसको धारण करने से आपकी सुरक्षा होती है. इसे कमर से ऊपर वाले हिस्से में पहना जाता है, जिसकी संख्या 11, 21, 51 होती है.
रास्ते में मिल जाए तो समझिए किस्मत चमक गई
ज्योतिषाचार्य ने कहा कि आप सुरक्षित यात्रा के लिए कौड़ी का उपयोग कर सकते हैं. अगर आपको रास्ते में कहीं कौड़ी मिल जाए तो आप सौभाग्यशाली होते हैं. यह आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि करेगा. पूजा घर और तिजोरी में रखने के लिए लोग आज भी इसे काफी मांग रहे हैं.


