खैरथल । राजस्थान सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की राशि खातों में डालने के नाम पर कुछ हैकर्स द्वारा आमजन के साथ साइबर ठगी की घटनाएं सामने आई हैं। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आमजन से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कुछ साइबर अपराधी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के PCTS पोर्टल और महिला एवं बाल विकास विभाग के सॉफ्टवेयर से गर्भवती और धात्री महिलाओं की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे बैंक खाता संख्या और आधार नंबर प्राप्त कर रहे हैं। इसके बाद वे कॉल कर महिलाओं से यह कहकर ओटीपी (OTP) मांगते हैं कि उनके खाते में सरकार की योजना की राशि डाली जा रही है। जैसे ही व्यक्ति ओटीपी साझा करता है, उसी पल उसके खाते से पैसे गायब कर दिए जाते हैं।
हाल ही में मुंडावर ब्लॉक में हुई घटनाएं
विगत दो दिनों में मुंडावर ब्लॉक के कई ग्रामीणों के खातों से इसी प्रकार फर्जी ओटीपी के जरिए राशि निकाले जाने की घटनाएं हुई हैं। यह स्पष्ट रूप से एक फ्रॉड है और इससे आमजन में चिंता का माहौल बन गया है।
अधिकारियों की अपील: सावधानी ही सुरक्षा है
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विभाग का कोई भी कर्मचारी कभी भी मोबाइल फोन पर ओटीपी नहीं मांगता है। यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की कॉल आती है, जिसमें उनके खातों से संबंधित जानकारी, आधार नंबर या ओटीपी मांगा जाता है, तो उसे किसी भी हालत में साझा न करें। ऐसी जानकारी गोपनीय रखें और तुरंत स्थानीय प्रशासन या साइबर क्राइम सेल को सूचित करें।
सूचना देने का अधिकार सिर्फ अधिकृत कर्मचारियों को
सीएमएचओ अरविंद गेट ने कहा है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या आशा कार्यकर्ता ग्राम स्तर पर जाकर व्यक्तिगत रूप से योजनाओं की जानकारी लेता है और पहचान प्रस्तुत करता है, तभी उसे संबंधित जानकारी दें। अन्य किसी व्यक्ति को न खाता संख्या, न आधार विवरण और न ही ओटीपी साझा करें।
समस्त ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के नागरिकों से अपील
सरकार की योजनाओं के नाम पर की जा रही यह साइबर ठगी न केवल आमजन की मेहनत की कमाई को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि सरकारी योजनाओं की छवि को भी प्रभावित कर रही है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह सतर्क रहे, सजग रहे और अपने डिजिटल डाटा की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।“धोखाधड़ी से बचने का सबसे बड़ा उपाय है — अपनी जानकारी को गुप्त रखना और ओटीपी किसी को न बताना।”
यदि आपको भी इस तरह की कोई कॉल आती है तो तुरंत संबंधित विभाग, नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं।

