टमेरा, पुर्तगाल | 4-8 जुलाई
भारत के जलपुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित स्वराज विमर्श यात्रा 2025 का आयोजन पुर्तगाल के टमेरा स्थित पीस कम्युनिटी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस यात्रा में भारतीय परंपरागत ज्ञान, जल संरक्षण और वैश्विक सतत विकास विषयों पर चर्चा हुई।
यात्रा की शुरुआत गणेश व सरस्वती वंदना और जल प्रार्थना के साथ हुई, जहाँ विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार प्रार्थनाएं प्रस्तुत कीं। उद्घाटन सत्र में जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा – “जल सबसे बड़ा तीर्थ है, और प्रकृति के अनुरूप चलने की गति ही सच्ची शांति का मार्ग है।”
भारतीय ज्ञानतंत्र का वैश्विक मंच पर सम्मान
राजेंद्र सिंह ने भारतीय परंपरागत ज्ञान, वसुधैव कुटुंबकम और सतत जीवनशैली के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की आत्मा आज भी प्रकृति के अनुकूल चलती है, और आधुनिक गति की अराजकता में शांति की खोज प्रकृति की ओर लौटकर ही संभव है।
जल संरक्षण का पुर्तगाली मॉडल – टमेरा
5 जुलाई को जलपुरुष जी ने टमेरा कम्युनिटी के जल संरक्षण प्रयासों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि यूकेलिप्टस हटाकर पारंपरिक जल संरचनाएं बनाकर इस क्षेत्र को जल-समृद्ध और बाढ़ मुक्त बनाया गया है। उन्होंने डैम ऊंचाई और ओवरफ्लो सिस्टम को मजबूत करने की सिफारिश भी की।
तरुण भारत संघ के 50 वर्षों की यात्रा – वैश्विक मंच पर प्रस्तुति
6 जुलाई को आयोजित सम्मेलन में जलपुरुष जी ने तरुण भारत संघ के 50 वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने जल, प्रकृति और संस्कृति के परस्पर संबंधों पर आधारित भारत की परंपराओं को वैश्विक प्रतिनिधियों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस मौके पर तरुण भारत संघ की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान की घोषणा
सम्मेलन के दौरान 10 जुलाई को पुर्तगाल के ओवा हॉल में आयोजित होने वाले तरुण भारत संघ अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह की घोषणा की गई। इसमें दुनिया भर से 17 प्रकृति प्रेमियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा, जिनमें टमेरा की संस्थापक सबीने, अफ्रीकी राजा सलीम डारा, अमेरिका की जीजी-वीरेन, और स्पेन-ब्राज़ील-पुर्तगाल के नदी संरक्षण कार्यकर्ता प्रमुख हैं।
निष्कर्ष
स्वराज विमर्श यात्रा न केवल भारतीय ज्ञान और संस्कृति का अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुतीकरण रही, बल्कि यह यात्रा वैश्विक साझेदारी, सामुदायिक जल संरक्षण और प्रकृति के साथ समरस जीवनशैली की ओर प्रेरणा का स्रोत बनी। जलपुरुष राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि यदि आधुनिक तकनीक और परंपरागत ज्ञान का समन्वय हो, तो दुनिया की हर कम्युनिटी आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध हो सकती है।


