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    वर्दी की आड़ में अपराध: पुलिसवालों ने ही किया किडनैपिंग और रॉबरी

    जोधपुर: पावटा मानजी का हत्था में दो दोस्तों का पुलिसकर्मियों ने डरा धमकाकर अपहरण किया और माता का थान थाने ले जाकर बंधक बनाकर अवैध रूप से दो लाख रुपए व क्रिप्टो करेंसी वसूली। किसी को न बताने की धमकी देकर दोनों को छोड़ा गया। डीसीपी को शिकायत करने पर बुधवार देर रात पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर चार-पांच सिपाहियों को हिरासत में लिया।

    पुलिस के अनुसार बनाड़ रोड पर नांदड़ी में रामदेव नगर निवासी दिलीप गौड़ की ओर से डीसीपी पूर्व को सौंपे परिवाद के आधार पर माता का थान थाने के पुलिसकर्मी जगमाल, राकेश व तीन-चार अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ बंधक बनाने, अपहरण करने और अवैध वसूली करने की एफआइआर दर्ज की गई है। पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर देर रात तक पूछताछ की जा रही है। इस संबंध में पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे रहे। मामले की जांच आइपीएस हेमंत कलाल को सौंपी गई है।

    ATM से 1 लाख निकाल वसूले

    दिलीप का आरोप है कि वो अपने दोस्त सुभाष चौक निवासी रमेश शर्मा के साथ कार लेकर 14 जुलाई की शाम चार बजे मानजी का हत्था के पास मॉल में खरीदारी करने गया था। मॉल के बाहर कार पार्क करने लगे तो पुलिस वर्दी में सिपाही जगमाल व तीन-चार अन्य पुलिसकर्मी सादे वस्त्र में वहां आए और दोनों को डराने धमकाने लगे।

    पुलिसकर्मियों ने डरा धमकाकर चालक सीट से दिलीप को नीचे उतारा और जगमाल वहां बैठ गया। बाकी पुलिसकर्मी पीछे बैठकर बोले, तुम्हारा अपहरण हो गया है, छूटने के लिए रुपए की व्यवस्था करो। दोनों दोस्तों से 50-50 हजार रुपए ले लिए। बाद में दोनों का अपहरण कर कार में माता का थान थाने ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मी राकेश भी था। सभी ने उन्हें डराया धमकाया। दोनों व उनके परिवारजन की बैंक की जानकारी ले ली। झूठे मामले में फंसाने की धमकियां देने लगे।

    क्रिप्टो करेंसी परिचित को ट्रांसफर करवाई

    आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने दिलीप से पत्नी का एटीएम कार्ड ले लिया और रमेश शर्मा को सौंपा। उससे पासवर्ड जानकार रमेश से एटीएम से एक लाख रुपए मंगवाए। जो पुलिसकर्मियों ने रख लिए। बाद में दिलीप का कीमती मोबाइल ले लिया और उसमें से क्रिप्टो करेंसी अपने परिचित को ट्रांसफर कर दी। फिर दोनों से कुछ हस्ताक्षर करवाए और किसी को न बताने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी। रात साढे आठ बजे मोबाइल देकर छोड़ा गया। पीडि़त डीसीपी के पास पहुंचे और परिवाद सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

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