शाहजहांपुर।, कस्बे से सटे बेलनी गांव के पहाड़ों में शनिवार दोपहर तेंदुए द्वारा एक बकरी का शिकार किए जाने की घटना से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। यह घटना उस समय हुई जब ग्रामीणों का एक समूह बकरियां चरा रहा था। तेंदुए की लगातार मौजूदगी और शिकार की घटनाएं वन्यजीवों के मानवीय क्षेत्रों में बढ़ते प्रवेश की गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रही हैं।
शनिवार दोपहर गुगन सिंह, बलराम, नत्थुराम, रामसिंह, दयाराम, जयराम, ग्यारसाराम, छाजू, लीलाराम, खेताराम और जनकसिंह राजपूत बेलनी के पहाड़ों पर बकरियां चरा रहे थे। इसी दौरान एक तेंदुआ झाड़ियों से निकलकर जनकसिंह की बकरी को उठा ले गया। जैसे ही ग्वालों ने शोर मचाया, तेंदुआ बकरी को घायल अवस्था में छोड़कर वापस जंगल की ओर भाग गया। लेकिन बकरी की गर्दन में गहरे दांत के निशान होने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में तेंदुआ अब तक 6 बकरियों का शिकार कर चुका है:
जयराम पुत्र घीसाराम की एक बकरी
नत्थुराम पुत्र हरनारायण की दो बकरियां
रामसिंह पुत्र खालीराम, छाजू पुत्र झूथाराम, और हरिराम पुत्र घीसाराम की एक-एक बकरी
लगातार हो रहे इन हमलों से बकरीपालकों में भय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान की चिंता भी बढ़ रही है।
क्यों बढ़ रही हैं तेंदुओं की हलचल?
यह बदलाव पहले भी सामने आया है:
कोरोना काल में शाहजहांपुर टोल प्लाजा के पास एक ज़रख की सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी।
बेलनी, जौनायचाकलां और कुतीना में भी तेंदुए देखे जा चुके हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में निगरानी बढ़ाने और तेंदुए को पकड़ने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो तेंदुए द्वारा मानव पर हमला होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।