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    देसी घी निकला नकली: भगवान के नाम पर कारोबार, फूड सेफ्टी की कार्रवाई

    अमृतसर (पंजाब)।  अमृतसर में कान्हा जी के नाम पर नकली देसी घी बनाकर बेचने का मामला सामने आया है। फूड सेफ्टी विभाग और पंजाब पुलिस ने बुधवार देर रात गांव गिलवाली में जीके फूड ट्रेडिंग कंपनी में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान कंपनी मालिक बिक्रमजीत सिंह फरार हो गया। लेकिन मौके पर कंपनी के कर्मचारी पंकज कुमार को थाना चाटीविंड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 

    फूड सेफ्टी विभाग के सहायक कमिश्नर राजिंदर पाल सिंह ने बताया कि संयुक्त कार्रवाई के दौरान 368 किलोग्राम नकली घी, 330 किलो वनस्पति, रिफाइंड तेल और पांच किलो देसी घी का फ्लेवर बरामद किया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 बरसों से गांव में नकली घी बनाने का कारोबार चल रहा था और शहर में हर रोज मिलावटी घी सप्लाई होता था। वनस्पति घी में केमिकल डालकर महज 5 से 15 मिनट में देसी घी तैयार किया जाता था। 

    राजिंदर पाल ने बताया कि चेकिंग के दौरान फैक्टरी से नकली देसी घी के अलावा गैस सिलेंडर, कांटा, टब और पेकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक डिब्बी बरामद की हैं। राजिंदर पाल सिंह ने बताया कि फैक्टरी से देसी घी के दो, रिफाइंड तेल का 1 और वनस्पति का 1 सैंपल लेकर खरड़ लैब में भेज दिया है। नकली घी बनाने के लिए कौन-कौन से केमिकल का इस्तेमाल होता था, इसका पता रिपोर्ट आने के बाद लगेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल फैक्टरी को सील कर दिया गया है।
     
    कमाई के लिए लोगों की सेहत से कर रहे खिलवाड़

    राजिंदरपाल ने बताया कि मिलावटी घी बनाने में 60 से 100 रुपये खर्च आता है और यह होलसेल में 180 से 200 रुपये तक में बिकता है। इसे दुकानदार 250 से 350 तक में बेचते हैं। यहां तक कि ब्रांडेड डिब्बा बंद देसी घी की बात करें तो यह 350 से 400 रुपये में मिलता है। वहीं, डेयरी वालों से शुद्ध देसी घी 600 से 750 रुपये प्रति किलो मिलता है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर बाजार में तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इसलिए दुकानदार ज्यादा कमाई के लालच में आकर मिलावटी चीजों का इस्तेमाल कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। 

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