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    रक्षाबंधन पर बीमा सुरक्षा के संकल्प की अनूठी पहल, अलवर बना प्रेरणा का केंद्र


    “रक्षा सूत्र – बीमा सुरक्षा का संकल्प” अभियान की शुरुआत, विद्यार्थियों के हाथों बंधेगा बीमा का संदेश
    अलवर, । रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार नहीं है, यह सुरक्षा, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इसी पावन अवसर पर अलवर जिले ने एक प्रेरणादायी कदम उठाया है—एक ऐसा संकल्प जो सिर्फ कलाई पर नहीं बंधेगा, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा को सशक्त बनाएगा।
    जिला कलेक्टर श्रीमती अर्तिका शुक्ला के मार्गदर्शन में “रक्षा सूत्र – बीमा सुरक्षा का संकल्प” नामक एक जन-जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जो पूरे जिले के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य है—विद्यार्थियों को बीमा सुरक्षा का महत्व समझाकर उनके माध्यम से प्रत्येक परिवार तक यह जागरूकता पहुँचाना।
    राखी के साथ बीमा का वचन
    कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों द्वारा एक-दूसरे को राखी बांधते समय “बीमा सुरक्षा का संकल्प” दोहराया जाएगा। प्रत्येक छात्र को एक अतिरिक्त रक्षा सूत्र और एक संक्षिप्त बीमा संदेश पत्रक प्रदान किया जाएगा, जिसे वे अपने परिवार के किसी सदस्य को बांधकर यह संदेश देंगे—
    “बीमा है सुरक्षा का कवच, जिससे जीवन में आती है आर्थिक संबल और स्थिरता।”
    यह पहल रक्षाबंधन की भावनात्मकता को सामाजिक जिम्मेदारी में रूपांतरित करने का प्रयास है, जिससे हर घर बीमा के दायरे में आए और असमय संकटों से सुरक्षित हो।
    शिक्षा से संरक्षण की दिशा में प्रयास
    राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग, अलवर के संयुक्त निदेशक डॉ. संजीव कुमार दास ने बताया—

    “राखी एक प्रेम और सुरक्षा का बंधन है, और बीमा एक परिवार की आर्थिक सुरक्षा का कवच। हमारा उद्देश्य है कि अलवर भारत का पहला ऐसा जिला बने जहाँ प्रत्येक नागरिक बीमा सुरक्षा के महत्व को न सिर्फ समझे, बल्कि उसे अपनाए भी।”

    डॉ. दास ने कहा कि यह अभियान बच्चों को बीमा जैसी विषयवस्तु से सहजता से जोड़ेगा और वे बीमा को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता के रूप में देखना शुरू करेंगे।
    विद्यालयों में होंगी रचनात्मक गतिविधियाँ
    इस अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में निम्नलिखित गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी:
    • प्रार्थना सभा में बीमा सुरक्षा पर प्रेरणादायक भाषण और संदेश।
    • पोस्टर, नारा लेखन एवं दीवार लेखन प्रतियोगिताएँ, जिनके विषय होंगे— “बीमा है सुरक्षा का कवच”, “बीमा से जीवन सुरक्षित”, “हर परिवार हो बीमित”।
    • छात्रों द्वारा बीमा सुरक्षा का संकल्प लेना।
    • बीमा संदेश सहित रक्षा सूत्र को परिवार के किसी सदस्य को बाँधना।
    इन सभी गतिविधियों की रिपोर्टिंग ब्लॉक स्तर पर संकलित कर राज्य बीमा विभाग को भेजी जाएगी, जिससे अभियान की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
    प्रशासन की सक्रिय भागीदारी
    जिला स्तरीय बीमा समिति की अध्यक्ष जिला कलेक्टर श्रीमती अर्तिका शुक्ला ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि वे इस कार्यक्रम को रक्षाबंधन के दिन गरिमापूर्ण, प्रेरणादायक और प्रभावी तरीके से आयोजित करें, ताकि बीमा सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक परिवारों तक पहुँच सके।
    उन्होंने कहा—

    “एक सूत्र से जुड़ेगा संकल्प, और हर कलाई से पहुंचेगा सुरक्षा का संदेश। हमें यह सुनिश्चित करना है कि बीमा अब एक विकल्प नहीं, हर घर की जरूरत बन जाए।”

    संदेश जो संकल्प बन जाए:
    • “एक सूत्र, एक संकल्प – हर घर बीमा सुरक्षित हो।”
    • “रक्षा सूत्र के साथ बीमा का वचन – सुरक्षा का सही बंधन!”
    निष्कर्ष
    यह पहल बीमा को लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनाने की एक भावनात्मक और सामाजिक कोशिश है। जब एक बच्चा अपने पिता, भाई या दादा को राखी बांधते हुए कहेगा— “पापा, अब बीमा करवाओ, ये रक्षा सूत्र सिर्फ राखी नहीं, हमारी सुरक्षा का प्रतीक है”— तो वह पल महज एक त्योहार नहीं, बदलाव की शुरुआत होगा।
    अलवर ने बीमा जागरूकता को एक संस्कार में ढालने की जो कोशिश की है, वह निस्संदेह पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन सकती है।

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