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    टीकाराम जूली ने अमेरिका के श्री गुरु रविदास गुरुद्वारा में की अरदास, जताया संत रविदास के विचारों में विश्वास

    नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क स्थित श्री गुरु रविदास गुरुद्वारा में अरदास कर गुरु रविदास के समरसता और भक्ति के संदेश को याद किया।

    मिशनसच न्यूज ।
    राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं और इस दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित श्री गुरु रविदास गुरुद्वारा में जाकर अरदास कर देश और समाज की खुशहाली की कामना की।

    इस अवसर पर उन्होंने संत रविदास जी के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि – “गुरु रविदास एक ऐसे संत थे, जिन्होंने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया बल्कि समाज के हर वर्ग को एक समान दृष्टि से देखने की प्रेरणा दी। जाति-पाति, ऊँच-नीच से ऊपर उठकर भक्ति मार्ग पर चलना ही सच्ची सेवा है।”

    भारतीय मूल के लोगों का सम्मान और संवाद

    इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष परमजीत कमम, पूर्व अध्यक्ष जसविंदर सिंह, सचिव बलविंदर भौरा, मास्टर कृपाल सिंह, सीताराम, बलबीर चांदमल, बलदेव रंधावा, तविंदर बैंस, और प्रोफेसर रनवीर सिंह ने जूली, उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा और विधायक अमीना कागजी का पुष्पगुच्छ, शॉल व सरोपा भेंट कर स्वागत किया।

    टीकाराम जूली ने कहा कि, “अमेरिका में बसे भारतीयों विशेष रूप से सिख समुदाय ने जिस मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी से पहचान बनाई है, वह पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यहाँ रहकर भी उनका भारत के प्रति प्रेम और जुड़ाव अद्भुत है।”

    ग्लोबल स्तर पर भारत की सांस्कृतिक छवि

    जूली ने गुरुद्वारा में उपस्थित श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए कहा कि भारत की सनातन संस्कृति, गुरुओं की शिक्षाएं और संतों के विचार आज वैश्विक मंच पर सम्मान पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, “संत रविदास जी का जीवन स्वयं में एक मिशन है – भेदभावमुक्त समाज, करुणा और समर्पण से भरी भक्ति।”

    राजनीतिक से परे, आध्यात्मिक जुड़ाव

    अमेरिका जैसे वैश्विक देश में जाकर गुरु रविदास के चरणों में शीश नवाकर जूली ने यह स्पष्ट किया कि राजनीति के परे भी एक आध्यात्मिक और सामाजिक उत्तरदायित्व होता है। उनकी यह यात्रा भारतीय मूल के लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और संस्कृति से संवाद का माध्यम बनी।

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