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    महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की तैयारी, शिवराज ने बैंकों से मांगा सहयोग

    नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत खरीफ सीजन में अधिक से अधिक किसानों के नामांकन के लिए और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अधिक लोन उपलब्ध कराने के लिए सभी बैंकों और राज्य सरकारों के साथ वर्चुअल बैठक ली।
    मंत्री ने बैंकों को निर्देश दिए कि वे महिलाओं को लोन देने पर विशेष फोकस करें और दूरदराज, दुर्गम क्षेत्रों में भी कवरेज बढ़ाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों को वित्तीय सहायता मिल सके।
    कृषि मंत्री ने निर्णय लिया कि खरीफ सीजन में किसानों को फसल बीमा का सुरक्षा कवच देने के लिए 16 से 30 अगस्त तक पूरे देश में एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान योजना से जुड़ सकें।
    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विकास गति तेजी से बढ़ रही है। कृषि हमारे देश की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। सरकार गरीब, ग्रामीण और महिलाओं के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
    उन्होंने बताया कि देश में लगभग 90 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। इन समूहों को अब तक 11 लाख करोड़ रुपए का लोन दिया जा चुका है। स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम बन चुके हैं।
    शिवराज सिंह ने बैंकों की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि कुछ राज्य और जिले अभी पीछे हैं। बैंकों से आग्रह किया कि वे वित्तीय समावेशन बढ़ाने और पिछड़े क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करें।
    मंत्री चौहान ने जोर दिया कि सिर्फ स्वयं सहायता समूहों को ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी महिलाओं को लोन देना जरूरी है ताकि वे “लखपति दीदी” बनने के लक्ष्य को पूरा कर सकें। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों का एनपीए केवल 0।7% है, जो उनकी विश्वसनीयता दर्शाता है।
    उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड  से ऋण 10।25 लाख करोड़ रूपये को पार कर गया है। बैंकों द्वारा अब 75% ऋण किसानों  तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे किसान महंगे ब्याज दरों से बच रहे हैं। हालांकि कुछ शिकायतें भी आती हैं, जैसे छोटे लोन पर कोलेटरल मांगना, जिस पर मंत्री ने कड़ा निर्देश दिया कि किसानों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
     

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