काले खा बाग में नगर पालिका सार्वजनिक निर्माण विभाग आई टी केंद्र सहित अनेक सरकारी कार्यालय, एसडीएम डीएसपी व न्यायिक अधिकारियों के बंगलों फिर भी संत काले खां मार्ग पर अंधेरा और बदहाल सड़क।
मुकेश सोनी, किशनगढ़ बास।
राजस्थान के अलवर जिले के किशनगढ़ बास कस्बे में स्थित काले खां बाग प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। इस बाग में नगर पालिका, सार्वजनिक निर्माण विभाग, वन विभाग, कृषि विभाग, ब्लॉक शिक्षा कार्यालय से लेकर उपखंड अधिकारी (एसडीएम), पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और न्यायिक अधिकारियों के आवास तक स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त नरेगा कार्यालय और आईटी केंद्र भी इसी क्षेत्र में संचालित होते हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने महत्वपूर्ण दफ्तरों और अफसरों की मौजूदगी के बावजूद सिद्ध संत काले खां जी महाराज की स्थली की उपेक्षा की जा रही है।
काले खां बाग केवल एक सरकारी दफ्तरों का क्षेत्र नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक धरोहर भी है। आज़ादी से पहले से यह स्थान संत काले खां जी का तपस्थल रहा है और आज भी उनके श्रद्धालु प्रतिदिन यहां आकर माथा टेकते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जहां रोजाना अधिकारी आते-जाते हैं, वहीं इस संत की स्थली तक पहुंचने वाला मात्र 50 मीटर का रास्ता जर्जर हालत में है और वहां अंधेरा पसरा हुआ है क्योंकि स्ट्रीट लाइटें खराब हैं।
नगरपालिका का कार्यालय इस स्थान के पास ही स्थित है और उस संस्था की जिम्मेदारी होती है कि वह पूरे क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं, विशेषकर लाइट और सड़क, सुनिश्चित करे। लेकिन देखा गया है कि अधिकारियों के बंगले और विशिष्ट भवनों तक नई सड़कें बना दी जाती हैं, जैसे कि एसडीएम बंगला या न्यायाधीश आवास तक, वहीं आस्था का केंद्र – संत काले खां की स्थली प्रशासनिक प्राथमिकता से बाहर है।
गंज मोड़ से जेल रोड तक के इलाके में नालियों, लाइट और सड़क का कार्य पूरा हो चुका है। इन स्थानों की साज-सज्जा प्रशासनिक दृष्टिकोण से पूरी है, लेकिन महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित इस धार्मिक स्थल की दशा दयनीय बनी हुई है।
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से जनता की अपील है कि वे इस पवित्र स्थल की अनदेखी ना करें। काले खां बाग न केवल अफसरों का ठिकाना है, बल्कि एक सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान भी रखता है। ऐसे में इस स्थान को उचित ध्यान और विकास योजनाओं में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


