More
    Homeराजस्थानअलवरसरिस्का : CTH मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, नहीं चलेंगी खानें  ,पुराने...

    सरिस्का : CTH मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, नहीं चलेंगी खानें  ,पुराने आदेश से छेड़छाड़ न करने को कहा

    CTH मामले में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने भाषण में  बताया था वैज्ञानिक आधार पर
    राजेश रवि ,नई दिल्ली/अलवर।
    सरिस्का के सीटीएच मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीटीएच मामले में पुराने फैसले पर छेड़छाड़ नहीं की जाए। पूर्व में सेंचुरी बढ़ाने का आदेश दिया था ना कि सीटीएच को कम करने का । इस आदेश के बाद सरिस्का में खानों को शुरू करने की सरकार की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। पर्यावरणविदों ने इस पर खुशी जताई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में सीटीएच को कम करने को वैज्ञानिकों व एक्सपर्ट का फैसला बताया था, वहीं विपक्षी नेताओं को बयानवीर की संज्ञा दी थी।
    सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि संशोधन को 22 जून को अलवर में पास किया गया, 23 को राज्य सरकार ने जयपुर में पास कर दिया, 24 को दिल्ली में एनटीसीए ने पास किया , 26 को देहरादून में पास किया और 2 जुलाई को इसे सही बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया गया। इस पर भी कोर्ट ने पूछा कि इसमें इतनी तेजी कैसे आई।
     शीर्ष अदालत ने  कहा है कि उसके पूर्व आदेश – जिसमें सरिस्का के एक किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया था – से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
    कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो टूक कहा कि बाघ संरक्षण के लिहाज से सरिस्का क्षेत्र की पारिस्थितिकी बेहद संवेदनशील है और उसमें किसी तरह की छूट या फेरबदल पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
    क्या है मामला?
    राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व को क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) घोषित किया गया है। यह घोषणा इस क्षेत्र को बाघों के संरक्षण के लिए पूर्णतः सुरक्षित और संरक्षित क्षेत्र बनाए रखने की दृष्टि से की गई थी।
    हाल ही में सरकार की ओर से CTH की सीमाओं को लेकर कुछ प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे यह आशंका पैदा हुई कि एक किलोमीटर के प्रतिबंधित दायरे में खनन को छूट दी जा सकती है। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगाह में आया।
    अदालत ने क्या कहा?
    सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उसने पूर्व के आदेशों का पालन किया है या नहीं। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या वर्तमान में प्रस्तुत प्रस्ताव पूर्व आदेशों की भावना के अनुरूप हैं या उसके विरुद्ध।
    पर्यावरणीय चिंता फिर सतह पर
    इस मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या बाघों के संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा के नाम पर घोषित संरक्षित क्षेत्रों में आर्थिक लाभ के लिए ढील दी जा सकती है? पर्यावरण कार्यकर्ता पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध करते आ रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि यदि CTH क्षेत्र के भीतर खनन की अनुमति दी गई तो इसका खामियाजा पूरे पारिस्थितिक तंत्र को भुगतना पड़ेगा।
    आगे की प्रक्रिया
    अब इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद कोर्ट अगली सुनवाई में आगे की दिशा तय करेगा। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की नजरें भी इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

    इस मामले में हमें अभी तक किसी भी पक्ष की प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अगर मिलती है तो अपडेट कर दिया जाएगा। 

     

     

    मिशन सच से जुडने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को फॉलो करे  https://chat.whatsapp.com/JnnehbNWlHl550TmqTcvGI?mode=r_c

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here