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    भिंड का शिखर कैनो वर्ल्ड चैंपियनशिप में परचम लहराने को तैयार, बीहड़ से विदेश की छलांग

    भिंड: मध्य प्रदेश का सबसे बदनाम इलाका रह चुका भिंड अपनी पहचान प्रदेश के उभरते हुए वाटर स्पोर्ट्स के खिलाड़ियों के गढ़ के रूप में बना रहा है. यहां हर साल कैनो और कयाकिंग जैसे खेलों में नए खिलाड़ी निकल रहे हैं, जो देश दुनिया में प्रदेश और भिंड का नाम रोशन कर रहे हैं. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं शिखर दुबे, जो अगले महीने हंगरी में आयोजित होने वाली वर्ल्ड कैनो मैराथन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं. भिंड का बेटा जल्द विदेश की धरती पर भारत का परचम लहराने को तैयार है.

    अगले महीने हंगरी में आयोजित होगी चैंपियनशिप

    महज 17 साल की उम्र और हौसला देश के लिए कुछ कर गुजरने का, ये जज्बा दिखा रहे हैं भिंड के शिखर दुबे. जिन्होंने पानी पर अपनी नाव ऐसे दौड़ाई कि अगले महीने दुनिया के सामने खेल जगत में भारत का प्रतिनिधत्व विदेशी धरती हंगरी के बुडापेस्ट में करने जा रहे हैं. शिखर दुबे एक कैनो प्लेयर हैं और 4-7 सितंबर तक आयोजित होने वाली कैनो मैराथन विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से खेलने वाले हैं.

     

    पिता ने किया शिखर को प्रेरित

    भिंड शहर के बीटीआई रोड इलाके में पले-बढ़े शिखर एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं. मां कविता गृहणी हैं और पिता राकेश दुबे एक सरकारी शिक्षक हैं. भिंड में उनके पिता गौरी सरोवर में खिलाड़ियों को अक्सर ड्रैगन बोट और कैनो कयाकिंग चलाते देखते थे. उन्होंने शिखर को इस खेल में आगे आने के लिए प्रेरित किया और उनके कहने पर शिखर ने ड्रैगन बोट में हाथ आजमाया.

    ढाई साल में जीते कई मेडल्स

    स्थानीय कोच राधे गोपाल यादव से ड्रैगन बोट और कैनो कयाकिंग की ट्रेनिंग शुरू की और सिर्फ ढाई साल की मेहनत में इस युवा खिलाड़ी ने ड्रैगन बोट में 6 नेशनल खेले और सभी में सिल्वर मेडल जीता है. इसके अलावा केनो में भी एक बार नेशनल चैंपियनशिप खेली है हालांकि उस चैंपियनशिप में वे चौथे नंबर पर रहे थे.

     

    'सिलेक्शन पर पैरेंट्स को लगा मजाक कर रहा हूं'

    शिखर का खेल के प्रति जनून लगातार बढ़ रहा है. यही वजह है उन्होंने चंडीगढ़ में 2-3 अगस्त को हुए कैनो मैराथन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए ट्रायल्स में भाग लिया था. 5 अन्य खिलाड़ियों के साथ उन्होंने भी इसमें सफलता हासिल की. शिखर बताते हैं कि "जब उनका नाम फाइनल हुआ और उन्होंने माता-पिता को बताया तो वे मानने को तैयार ही नहीं थे. उन्हें लगा की ये मजाक है लेकिन जब हंगरी से वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने लिए वहां के केनो प्रेसिडेंट का इनविटेशन उनके घर पहुंचा तब घर वालों को यकीन हुआ. इसके बाद तो घर का माहौल ही बदल गया." पिता ने खुशी में सभी रिश्तेदारों को कॉल कर इस उपलब्धि की जानकारी दी.

    सपनों के बीच आर्थिक संकट बन रहा रुकावट

    शिखर के लिए यह चैंपियनशिप बहुत महत्वपूर्ण है और विदेश में होने की वजह से कुछ आर्थिक समस्याएं भी आ रही हैं. शिखर ने बताया कि "इस चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए उन्हें एसोसिएशन या सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है. ऐसे में इसमें भाग लेने के लिए खुद ही खर्च उठाना पड़ेगा. जिसमें करीब 2 से ढाई लाख का खर्चा होगा. लेकिन उनका परिवार सीमित और मध्यम वर्ग से है, जिसकी वजह से अब आर्थिक परेशानी हो रही है. हालांकि वे इसके लिए समाजसेवियों से फंड अरेंज करने की कोशिश कर रहे हैं."

     

    विश्व पटल पर नाम रोशन करने को तैयार भिंड का बेटा

    शिखर आने वाली 4 सितंबर को दिल्ली से हंगरी के लिए रवाना होंगे और वे बुडापेस्ट में 6 सितंबर को इस कैनो मैराथन वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेंगे. उन्हें उम्मीद है कि ये प्रतिस्पर्धा उनके खेल को जीवन में एक नया मुकाम देगी और वे देश-विदेश में भिंड का नाम रोशन करेंगे.

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