More
    Homeदेशसोता नदी पर अवैध खनन व प्रदूषण रोकने के लिए NGT के...

    सोता नदी पर अवैध खनन व प्रदूषण रोकने के लिए NGT के सख़्त निर्देश

    भोपाल / सीकर। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) की सेंट्रल बेंच भोपाल ने 1 सितम्बर को सोता नदी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले (अमित कुमार एवं कैलाश मीणा बनाम राज्य) में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नदी के संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और जल गुणवत्ता बहाली के लिए कई ठोस निर्देश जारी किए हैं।

    आदेश के मुख्य बिंदु

    अवैध खनन और अतिक्रमण पर रोक – सचिव (पर्यावरण) को सक्षम अधिकारियों की समिति गठित करने का निर्देश, जिसकी निगरानी जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।

    नदी में सतत प्रवाह सुनिश्चित – प्रदूषण रोकने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए सूखी नदी में निरंतर जल प्रवाह आवश्यक बताया गया।

    समयबद्ध कार्ययोजना – नदी के पुनर्जीवन के लिए चरणबद्ध कार्य योजना तैयार की जाएगी।

    रेत खनन पर नियंत्रण – सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश 2016 और निगरानी दिशानिर्देश 2020 के अनुरूप ही खनन की अनुमति होगी, उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।

    बाढ़ मैदान और नदी किनारों का सीमांकन – किसी भी तरह का अतिक्रमण हटाने का निर्देश, ग्रीन बेल्ट विकसित करने की योजना।

    प्रदूषण पर रोक – बिना उपचारित जल, सीवेज या रसायनों का निर्वहन पूरी तरह प्रतिबंधित, केवल ट्रीटेड पानी का उपयोग सिंचाई में किया जा सकेगा।

    ठोस अपशिष्ट प्रबंधन – शहरी प्रशासन को निर्देश कि नदी में कचरा जाने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

    जैव-विविधता संरक्षण – नदी घाटी क्षेत्र में स्थानीय पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश।

    अवैध ईंट भट्टों व मछली पकड़ने पर रोक – नदी के पास ईंट भट्टों की अनुमति नहीं, रसायन व विद्युत प्रवाह से मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध।

    आदेश की प्रति संबंधित विभागों को भेजी गई

    एनजीटी ने आदेश की प्रति राजस्थान सरकार के पर्यावरण, जल संसाधन विभाग, नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा कोटपुतली-बहरोड़ के जिला कलेक्टर को भेजने के निर्देश दिए हैं।

     

    एनजीटी के इस आदेश को सोता नदी और उसकी सहायक धाराओं के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो न केवल नदी पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के हितों की भी रक्षा होगी।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here