अलवर की साहित्यिक संस्था सृजक द्वारा आयोजित सबरंग कवि गोष्ठी में कवियों ने विविध रसों से सराबोर कविताओं की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरदार अमरीक सिंह ‘अदब’ ने की, जबकि डॉ. देवेन्द्र शर्मा और रघुवर दयाल जैन विशिष्ट अतिथि रहे।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था सृजक द्वारा रविवार को आयोजित सबरंग कवि गोष्ठी में स्थानीय कवियों ने अपने विविध रसों, भावों और संवेदनाओं से भरपूर काव्य पाठ के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में साहित्य, संगीत और संवेदना का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने उपस्थित जनों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्वलन से हुई। गीतकार गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
सबरंग कवि गोष्ठी की अध्यक्षता सरदार अमरीक सिंह ‘अदब’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि डॉ. देवेन्द्र शर्मा और विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार रघुवर दयाल जैन एवं गीतकार गिरवर सिंह बाँकावत मंच पर उपस्थित रहे।
कवि गोष्ठी में कवियों ने विविध विषयों पर अपनी प्रभावी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
डॉ. वेद प्रकाश ‘सहज’ ने अपने मेवाती गीत में ट्रक ड्राइवर की पत्नी की पीड़ा का मार्मिक चित्रण किया, जिसने श्रोताओं की आँखें नम कर दीं।
वरिष्ठ गीतकार गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ ने राजनीतिक चरित्र पर करारा व्यंग्य करते हुए ऐसा गीत सुनाया जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट देर तक गूंजती रही।
कवयित्री तपस्या बारेठ की रचनाओं में गुँथी सकारात्मकता और आशा के रंगों को दर्शकों ने खूब सराहा।
गिरवर सिंह बाँकावत ने अपनी रचनाओं में कलियुग की विडंबनाओं का सटीक चित्रण किया, जबकि प्रवेन्द्र पंडित ने ब्याज निंदा गीत प्रस्तुत कर समाज के मूल्यविहीन व्यवहार पर प्रहार किया।
ताराचंद जैन ‘अनुरागी’ के प्रेम पर आधारित पैरोडी गीतों ने वातावरण को मधुर बना दिया।
युवा कवि प्रेम प्रकाश शर्मा की अनूठी कहन और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने सभी को प्रभावित किया।
कवयित्री सीमा कालरा और रामचरण ‘राग’ ने बचपन पर आधारित कविताएँ सुनाकर सबका मन मोह लिया।
प्रदीप माथुर ने स्त्री विमर्श पर सशक्त कविता प्रस्तुत की, जबकि मुकेश गुप्त ‘अचल’ ने अपने दोहों में समय की सच्चाई को नपे-तुले शब्दों में पिरोया।
महेश वेदामृत की कविता में जीवन दर्शन की गहराई झलकी, वहीं जे.डी. राणा, मौ० रफ़ीक खान और धर्मेन्द्र शर्मा ‘मुज़्तरिब’ ने अपने मुक्तकों और शेरों के माध्यम से समसामयिक मुद्दों पर तीखा प्रहार किया।
मुख्य अतिथि डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने ‘भरत की पत्नी मांडवी’ की पीड़ा को स्वर दिया, तो रघुवर दयाल जैन ने अपनी हास्य रचनाओं से पूरे सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया।
अध्यक्ष सरदार अमरीक सिंह ‘अदब’ ने अपनी ग़ज़लों से माहौल को भावनात्मक और साहित्यिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
कार्यक्रम में मयंक नरूका, डॉ. शिवचरण चैड़वाल और पुनीत अवस्थी की रचनात्मक उपस्थिति ने भी आयोजन को विशेष आयाम दिए।
सबरंग कवि गोष्ठी एम.एन.सी.आई. कोचिंग संस्थान (रेलवे स्टेशन के सामने, संजय कॉलोनी, अलवर) के सभागार में आयोजित हुई।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता कॉ. राजकुमार बख्शी, सर्वेश जैन, खेमेन्द्र सिंह चंद्रावत, मुकेश मीणा, रामप्रकाश सैनी, राहुल, खुशाल सैनी, ज़मील खान, जितेन्द्र पोपली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन रामचरण ‘राग’ ने किया तथा आभार प्रदर्शन सृजक संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोकुल राम शर्मा ‘दिवाकर’ द्वारा किया गया।


