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    महागठबंधन का पतन: कांग्रेस की करारी हार ने डुबो दिया लुटिया, जानिए क्या है सीटों का आंकड़ा!”

    Bihar Election Results 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम महागठबंधन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे. मतगणना के रुझानों और अंतिम नतीजों ने साफ कर दिया कि सत्ता की दौड़ में पीछे रहने का सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सहयोगी कांग्रेस का बेहद खराब प्रदर्शन रहा है.

    महागठबंधन की सबसे बड़ी गलती कांग्रेस पर अत्यधिक भरोसा करना साबित हुई. तेजस्वी यादव की पार्टी ने कांग्रेस को सम्मानजनक रूप से 61 सीटें दी थीं, लेकिन परिणामों ने दिखाया कि कांग्रेस इनमें से अधिकांश सीटों पर जीत हासिल करने में पूरी तरह विफल रही.

    स्ट्राइक रेट हुआ धड़ाम

    चुनाव के अंतिम रुझानों के मुताबिक, कांग्रेस महज 5 से 9 सीटों पर ही सिमटती दिख रही है. अगर हम 61 सीटों पर पार्टी के प्रदर्शन को देखें तो इसका स्ट्राइक रेट 20% से भी नीचे चला गया है. राजनीतिक विश्लेषक इसे महागठबंधन के लिए ‘पैर में कुल्हाड़ी मारना’ जैसा बता रहे हैं, क्योंकि जिन सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही थी, उन्हें भी वह एनडीए के पाले में जाने से नहीं रोक पाई.

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    बिहार में सिमट गया ‘हाथ’ का जनाधार

    विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में अब कांग्रेस का स्वयं का जनाधार लगभग खत्म हो चुका है. यह पार्टी अब केवल एक ‘परजीवी’ बनकर रह गई है, जो सहयोगी दल के वोट बैंक पर निर्भर रहती है, लेकिन अपने दम पर मतदाताओं को रिझा नहीं पाती.

    यह समस्या नई नहीं है. पिछले विधानसभा चुनाव (2020) में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. तब पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और केवल 19 सीटें जीती थीं, जिसका स्ट्राइक रेट 27% था. इस बार, यह आंकड़ा और भी नीचे गिर गया है, जिससे यह साफ होता है कि बिहार की राजनीति में कांग्रेस की जमीन तेजी से सिकुड़ती जा रही है.

    प्रचार हुआ फीका

    चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान काफी आक्रामक प्रचार किया था. कई मुद्दों पर एनडीए को घेरने में वह कुछ हद तक कामयाब भी हुए, लेकिन यह माहौल को वोटों में बदलने में सफल नहीं हो पाया. जनता ने महागठबंधन की रैलियों में उत्साह दिखाया, मगर वोटिंग मशीन पर बटन दबाते वक्त उनका विश्वास कांग्रेस पर नहीं बन पाया. कुल मिलाकर, कांग्रेस का बेहद कमजोर प्रदर्शन 2025 के बिहार चुनाव में महागठबंधन की हार का एक बड़ा और निर्णायक कारक बन गया है.

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