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    नए श्रम कानून से UP में रोजगार का सुधरेगा माहौल, महिलाओं और गिग वर्कर्स को विशेष लाभ

    उत्तर प्रदेश में 21 नवंबर से चार नई श्रम संहिताएं पूरी तरह लागू हो चुकी हैं. इन संहिताओं से एक तरफ जहां हड़ताल और तालाबंदी के नियम सख्त हुए हैं, वहीं मजदूरों-कर्मचारियों के हितों को अभूतपूर्व सुरक्षा मिली गई है. खासकर महिलाओं, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कर्मियों के लिए यह कानून गेम-चेंजर साबित होने वाला है |

    हड़ताल अब इतनी आसान नहीं

    नई संहिताओं के तहत बिना 14 दिन की लिखित पूर्व सूचना के कोई भी हड़ताल या तालाबंदी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है. सामूहिक अवकाश को भी अब हड़ताल की श्रेणी में गिना जाएगा. यानी बिना नोटिस के एक साथ छुट्टी लेना भी कानूनी कार्रवाई को न्योता देगा |

    छंटनी-बंदी के लिए सरकार की अनुमति जरूरी

    अब 300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में छंटनी या पूरा प्लांट बंद करने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. इससे बड़े पैमाने पर होने वाली बेरोजगारी पर अंकुश लगेगा. वहीं कानून को लेकर मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि, 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर सिर्फ 4 संहिताएं बनाई गई हैं. इससे पालन करना आसान हुआ है. मजदूरों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और उद्योगों को भी अनावश्यक परेशानी से मुक्ति मिली है. मंत्री ने बताया कि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए हर जिले में शिकायत निवारण समिति, वार्ताकारी परिषद और दो सदस्यीय औद्योगिक अधिकरण का गठन किया जा रहा है |

    हर मजदूर को मिलेगा न्यूनतम वेतन

    अब संगठित हो या असंगठित क्षेत्र हर कर्मचारी को न्यूनतम वेतन मिलना तय है. नौकरी छूटने या इस्तीफा देने की स्थिति में सारे बकाया (वेतन, ग्रेच्युटी, बोनस आदि) दो कार्यदिवस के अंदर देना कंपनी के लिए बाध्यकारी होगा |

    महिलाओं को मिले ऐतिहासिक अधिकार

    • समान कार्य के लिए समान वेतन |
    • अपनी लिखित सहमति से रात्रि पाली में काम करने की पूरी छूट |
    • 26 हफ्ते का पूर्ण वेतन सहित मातृत्व अवकाश |
    • हर प्रतिष्ठान में क्रेश (शिशुगृह) की बाध्यकारी व्यवस्था |
    • कुछ क्षेत्रों में वर्क-फ्रॉम-होम का विकल्प |

    पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी मान्यता

    देश में पहली बार उत्तर प्रदेश ने गिग वर्कर्स (स्विगी-जोमैटो डिलीवरी पार्टनर, उबर-ओला ड्राइवर, अर्बन कंपनी कर्मी आदि) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी परिभाषा दी है. अब ये कर्मी भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आएंगे. एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% (अधिकतम अंतिम भुगतान का 5%) एक विशेष कल्याण कोष में जमा करना होगा. इस कोष से गिग वर्कर्स को दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन जैसी सुविधाएं मिलेंगी |

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