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    ऑनलाइन गवाही का नायाब मामला: कानपुर से न्यूयॉर्क तक कोर्ट की कार्रवाई रात भर जारी

    कानपुर | टेक्नोलॉजी ने लोगों का जीवन बहुत ही आसान कर दिया है. ऐसे एक शानदार उदाहरण बुधवार को उत्तर प्रदेश के कानपुर में देखने को मिला, जहां कानपुर की कोर्ट में न्यूयॉर्क से गवाही कराई गई. सबसे खास बात यह थी कि यह गवाही तब शुरू हुई जब कानपुर में शाम और न्यूयॉर्क में सुबह थी. इस गवाही के लिए कानपुर कोर्ट रात तक बैठी रही |

    कानपुर में भू-माफियाओं की ओर से एक मकान कब्जाने के मामले में न्यूयॉर्क में बैठी शिकायतकर्ता के भाई के बयान मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराए गए. इस मामले की खास बात यह है कि पीड़िता और उसका परिवार न्यूयॉर्क में रहता है और यह शहर का पहला मामला है, जिसकी गवाही न्यूयॉर्क से हुई. पीड़िता भाई ने न्यूयॉर्क के समय अनुसार तकरीबन सुबह 6 बजे कानपुर कोर्ट के सामने बयान दर्ज कराने शुरू किए, जबकि भारतीय समय के अनुसार यह गवाही शाम को 4.30 से रात 8.30 बजे तक चली |

    भू-माफियाओं ने किया कब्जा

    दरअसल, कानपुर आईआईटी की पूर्व छात्रा कविता शाह साल 2003 में अमेरिका के शिकागो शहर में जाकर बस गई थी. उनका कानपुर के आनंदपुरी में एक मकान है, जिसमें उनकी मां रहा करती थी. आरोप है कि साल 2004 में कविता की मां राजकुमारी शाह उनसे मिलने अमेरिका गई थी और उसी दौरान भू-माफिया नरेंद्र सिंह, कन्हैया गुप्ता और अजीत गुप्ता ने उनके मकान पर कब्जा कर लिया और फर्जी दस्तावेज बनवा लिए |

    अखिलेश यादव ने दिए थे जांच के आदेश

    यहां तक की उनकी मां के डिजिटल फर्जी हस्ताक्षर भी बना लिए थे. इस मामले की शिकायत पीड़िता ने साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की थी. इस शिकायत पर शासन की तरफ से डीएम कानपुर को जांच के आदेश दिए गए थे. इसके बाद साल 2016 में पीड़िता की तरफ से कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया गया और यह मुकदमा जे एम 8 की कोर्ट में चल रहा है. अधिवक्ता रवींद्र वर्मा ने बताया कि इस मामले की शिकायतकर्ता कविता शाह के बयान पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराए गए थे |

    दो देशों के बीच चला गवाही का दौर

    अब इसी मामले में उनके भाई संजय शाह के बयान होने थे. एसीजे जेडी 1 ईशा अग्रवाल की कोर्ट में इस गवाही को कराया गया. ऑनलाइन गवाही कराने के लिए टेक्निकल टीम को लगाया गया, जिसमें शलभ श्रीवास्तव, संजीव कुमार और सृष्टि अवस्थी मौजूद थी. पूरा मामला दो देशों के बीच गवाही का था. इसलिए बचाव पक्ष से अधिवक्ता मनीष कृष्ण, सरकारी वकील प्रज्ञानंद पांडे भी मौजूद थे |

    गवाही देने के लिए संजय शाह को न्यूयॉर्क ने मौजूद भारतीय दूतावास जाना पड़ा. शलभ श्रीवास्तव ने बताया कि गवाही तकरीबन 4 घंटे तक चली जिसकी लगातार मॉनिटरिंग पूरी टेक्निकल टीम करती रही. यह पूरा मामला एसीजे जेडी 1 ईशा अग्रवाल की कोर्ट में चल रहा है |

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