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    पीपुल, प्लानेट और प्रॉफिट के संतुलन से ही संभव है सतत विकास : प्रो. रमेश बैरवा

    अगर संतुलन बिगड़ा तो परेशानी होगी

    वजीरपुर, गंगापुरसिंटी। अरावली बचाओ विमर्श की पृष्ठभूमि में बुधवार को राजकीय कन्या महाविद्यालय, वजीरपुर में सतत विकास के समक्ष चुनौतियां” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भूगोल प्राध्यापक डॉ. ऋषिकेश गुर्जर ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल अधिकारी प्रो. रमेश बैरवा ने की, जबकि छायांकन का दायित्व छात्रा साक्षी वर्मा ने निभाया।

    डॉ. ऋषिकेश गुर्जर ने अपने व्याख्यान में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अपनाए गए 2030 एजेंडा के अंतर्गत निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें गरीबी और भूखमरी का उन्मूलन, बेहतर स्वास्थ्य और खुशहाली, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा, सभ्य कार्य एवं आर्थिक विकास, उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना, असमानताओं में कमी, सतत शहर एवं समुदाय, जिम्मेदार उपभोग एवं उत्पादन, जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई, जल के नीचे जीवन, भूमि पर जीवन, शांति, न्याय एवं मजबूत संस्थाएं तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए साझेदारी जैसे प्रमुख बिंदु शामिल हैं।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रमेश बैरवा ने सतत विकास की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि सतत विकास वह संतुलित विकास है, जो वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भावी पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता न करे। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। संसाधनों का उपयोग इस प्रकार होना चाहिए कि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रहें।
    प्रो. बैरवा ने जोर देते हुए कहा कि पीपुल, प्लानेट और प्रॉफिट—इन तीनों के बीच संतुलन स्थापित किए बिना सतत विकास संभव नहीं है।

    उन्होंने बताया कि वर्ष 1987 की ‘ब्रंटलैंड रिपोर्ट’ Our Common Future ने सतत विकास की अवधारणा को वैश्विक पहचान दिलाई। इसके बाद 1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन से यह विषय वैश्विक एजेंडे का केंद्रीय मुद्दा बना। वहीं 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए ‘एजेंडा 2030’ के तहत निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए गरीबी, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी समाधान अत्यंत आवश्यक है।

    कार्यक्रम में डॉ. संपूर्णानंद गौतम, डॉ. गिर्राज प्रसाद जोनवाल, डॉ. भूरसिंह सिंह गुर्जर, मानसिंह मीणा, महेंद्र कुमार धोबी सहित निकिता खंगार, सिद्धि मुद्गल, सपना माली, पायल माली, मधु मीणा, अंकिता मीणा, किरण मीणा, ज्योति सोनी, मुनेशी मीणा सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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