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    मकर संक्रांति पूर्व संध्या पर टीकाराम जूली ने किया बर्ड रेस्क्यू कैंप का दौरा

    मकर संक्रांति को पतंगबाजी के उत्सव में करुणा जरूरी, चाइनीज मांझे के बहिष्कार की अपील

    मिशनसच न्यूज, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मकर संक्रांति के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर जयपुर के रामनिवास गार्डन स्थित बर्ड रेस्क्यू कैंप का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए अपील की कि हम अपनी खुशियों के इस उत्सव में बेजुबान पक्षियों का भी विशेष ख्याल रखें

    कैंप में घायल पक्षियों की सेवा और उपचार की व्यवस्थाओं को देखकर जूली भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि त्योहार हमारी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा हैं, लेकिन यह तभी सार्थक हैं जब इनमें करुणा और संवेदनशीलता भी जुड़ी हो।

    मकर संक्रांति हमारी साझा खुशी का पर्व
    जूली ने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामूहिक आनंद का प्रतीक है। नीले आकाश में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें भारतीय परंपरा की सुंदर पहचान हैं। यह पर्व परिवार, मित्रों और समाज को एक-दूसरे से जोड़ता है।

    उन्होंने कहा, “मकर संक्रांति का पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आता है। पतंगबाजी की इस परंपरा का आनंद सभी को लेना चाहिए, लेकिन यह आनंद तभी पूर्ण होगा जब हमारी खुशी से किसी निर्दोष जीव को पीड़ा न पहुंचे।”

    खुशियों के बीच करुणा का भाव जरूरी

    रेस्क्यू कैंप में घायल पक्षियों को देखते हुए जूली ने कहा कि पतंगबाजी के दौरान उपयोग किया जाने वाला चाइनीज मांझा इन बेजुबान पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।

    उन्होंने कहा,“जहां उत्सव हमें आनंद देता है, वहीं हमारी एक छोटी सी लापरवाही इन पक्षियों के लिए जीवन-मरण का कारण बन जाती है। अगर हम चाइनीज मांझे के बजाय सूती धागे का प्रयोग करें, तो हमारी खुशियां दोगुनी हो जाएंगी, क्योंकि तब कोई पक्षी लहूलुहान नहीं होगा।”

    उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे मानवता और करुणा का परिचय देते हुए सुरक्षित मांझे का ही उपयोग करें।

    RAKSHA संस्था की सेवा बनी वैश्विक मिसाल

    इस अवसर पर जूली ने RAKSHA संस्था द्वारा संचालित बर्ड रेस्क्यू कैंप के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह देखकर गर्व होता है कि स्थानीय युवाओं के साथ-साथ इंग्लैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से आए विदेशी स्वयंसेवक भी पक्षियों की सेवा में जुटे हुए हैं।

    उन्होंने इसे “वसुधैव कुटुंबकम” की सच्ची भावना बताते हुए कहा कि जीव मात्र की सेवा ही सच्चा धर्म है। यह संस्था निस्वार्थ भाव से घायल पक्षियों का उपचार कर उन्हें नया जीवन दे रही है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

    प्रशासनिक मुस्तैदी और जनभागीदारी की जरूरत

    बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल एवं मुख्य सचेतक रफीक़ ख़ान के साथ जूली ने प्रशासन से आग्रह किया कि मकर संक्रांति के दौरान जन-जागरूकता अभियान तेज किया जाए।

    उन्होंने कहा कि चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर सख्त रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी पक्षी या नागरिक को नुकसान न हो। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरण और जीव सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए।

    प्रदेशवासियों के नाम विशेष संदेश

    कार्यक्रम के अंत में टीकाराम जूली ने प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए कहा, “मैं चाहता हूं कि राजस्थान का हर नागरिक मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाए। आप पतंगें उड़ाएं, पेंच लड़ाएं, मिठाइयों का आनंद लें, लेकिन यह संकल्प जरूर लें कि आपके मांझे से किसी पक्षी का पंख न कटे। पक्षियों को बचाना ही सच्ची इंसानियत और ईश्वर की सच्ची सेवा है।”

    संवेदनशील समाज की दिशा में प्रेरक पहल

    मकर संक्रांति के अवसर पर बर्ड रेस्क्यू कैंप का यह दौरा समाज को यह संदेश देता है कि उत्सव और संवेदना साथ-साथ चल सकते हैं। अगर प्रत्येक नागरिक थोड़ी सी जागरूकता अपनाए, तो हजारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है।

    जूली का यह संदेश निश्चित रूप से प्रदेश में मानवता, करुणा और पर्यावरण संरक्षण की भावना को और अधिक सशक्त करेगा।

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