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    250 साल पुराना माता तारा का यह मंदिर बेहद रहस्यमयी, गुप्त नवरात्रि में होते हैं विशेष अनुष्ठान, लोग हो जाते हैं हैरान

    गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. यह नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अलग और अधिक गोपनीय होती है, जिसमें साधक गुप्त रूप से मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की साधना करते हैं. पहले दिन मां काली की पूजा का विधान है, जबकि दूसरे दिन मां तारा के दर्शन-पूजन का विधान है. हिमाचल प्रदेश के शिमला में मां तारा देवी का प्राचीन मंदिर है, जो 250 साल से भी पुराना है. मां तारा देवी का यह मंदिर शिमला शहर से लगभग 13 किलोमीटर दूर शोघी हाईवे पर स्थित है और 7,200 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. मंदिर तक पहुंचने के लिए शोघी से एक घुमावदार लेकिन सुंदर सड़क से चढ़ाई चढ़नी पड़ती है. मंदिर की स्थापना लगभग 250 साल पहले हुई थी.

    कुलदेवी के रूप में साक्षात विराजमान माता तारा
    किंवदंती के अनुसार, सेन राजवंश के राजा भूपेंद्र सेन को एक रात स्वप्न में मां तारा ने दर्शन दिए. देवी ने राजा से कहा कि वह उनके लिए एक मंदिर बनवाएं. स्वप्न को सत्य मानते हुए राजा ने तुरंत मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करवाया. बाद में उनके वंशज बलवीर सेन ने मंदिर में अष्टधातु से बनी मां तारा की सुंदर मूर्ति स्थापित की. मान्यता है कि मां तारा यहां कुलदेवी के रूप में साक्षात विराजमान हैं. प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन को पहुंचते हैं. भक्तों का विश्वास है कि मां तारा उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं और मुसीबतों से बचाती हैं. मंदिर में आने वाले श्रद्धालु विशेषकर संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और सुरक्षा की कामना लेकर आते हैं.

    प्राचीन मंदिर की वास्तुकला पहाड़ी शैली में बना
    प्राचीन मंदिर की वास्तुकला भी देखने लायक है. यह पारंपरिक पहाड़ी शैली में बना है, जिसमें लकड़ी और पत्थर का प्रयोग किया गया है. छत स्लेट की बनी हुई है, जो हिमाचल की पुरानी इमारतों की खासियत है. मंदिर में जटिल नक्काशी और सुंदर डिजाइन स्थानीय कारीगरों की शानदार कला को दर्शाते हैं. हाल के वर्षों में हिमाचल पर्यटन विभाग ने मंदिर के पास एक नया, आधुनिक लेकिन पारंपरिक शैली में मंदिर भी बनवाया है. इस स्थान की सबसे बड़ी खासियत 360 डिग्री का पैनोरमिक नजारा है. हिमालय की बर्फीली चोटियां, हरे-भरे जंगल और घाटियां एक साथ दिखाई देती हैं, जो मन को शांति और भक्ति का अनुभव कराती हैं.

    माता तारा की चढ़ाई जाती है ये चीजें
    विशेष अवसर पर मंदिर प्रबंधन भक्तों के लिए मुफ्त सामुदायिक भंडारा भी आयोजित करता है. यहां गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना होती है. भक्त मां तारा को लाल फूल, चावल, सिंदूर, धूप-दीप और मिठाई चढ़ाते हैं. कई साधक इस दौरान विशेष अनुष्ठान और जप भी करते हैं. तारा देवी मंदिर ना केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है. शिमला घूमने आने वाले पर्यटक अक्सर यहां दर्शन करने जरूर आते हैं.

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