हिंदू धर्म में ज्ञान, कला और संगीत की देवी, देवी सरस्वती की पूजा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. बसंत पंचमी पर या हर दिन पढ़ाई शुरू करने से पहले उनके नामों का जाप करने से बुद्धि और ज्ञान जागृत होता है, ऐसा माना जाता है. शास्त्रों में देवी सरस्वती के बारह विशेष नामों का उल्लेख है, जिन्हें “द्वादश नाम” (बारह नाम) भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इन नामों का नियमित रूप से जाप करने से मंदबुद्धि व्यक्ति भी बुद्धिमान बन सकता है और उसकी वाणी में मधुरता आती है…
ये हैं माता सरस्वती के 12 दिव्य नाम-
-प्रथमं भारती नाम: भारती का अर्थ है—”वाणी की अधिष्ठात्री.”
-द्वितीयं च सरस्वती: सरस्वती का अर्थ है—”ज्ञान का निरंतर बहता हुआ प्रवाह.”
-तृतीयं शारदा देवी: शारदा का अर्थ है—”सफेद रंग वाली और निर्मल बुद्धि देने वाली.”
-चतुर्थं हंसवाहिनी: हंस पर सवार होने के कारण उन्हें हंसवाहिनी कहा जाता है, जो विवेक (नीर-क्षीर विवेक) का प्रतीक है.
-पञ्चमं जगती ख्याता: पूरे जगत में विख्यात और संसार को ज्ञान देने वाली.
-षष्ठं वागीश्वरी तथा: वागीश्वरी का अर्थ है—”वाणी की ईश्वरी या स्वामिनी.”
-सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता: कुमुदिनी के समान कोमल और प्रसन्न रहने वाली.
अष्टमं ब्रह्मचारिणी: ब्रह्म (परम सत्य) में लीन रहने वाली और तपस्या की प्रतिमूर्ति.
-नवमं बुद्धिदात्री च: बुद्धि और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करने वाली.
-दशमं वरदायिनी: भक्तों को मनोवांछित वरदान देने वाली.
-एकादशं चन्द्रकान्ति: चंद्रमा के समान शीतल और कांतिमय चमक वाली.
-द्वादशं भुवनेश्वरी: पूरे ब्रह्मांड (तीनों लोकों) की रक्षा और संचालन करने वाली माता.
सरस्वती द्वादश नाम स्तोत्र का महत्व-
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति प्रतिदिन सुबह उठकर या पढ़ाई शुरू करने से पहले इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे ‘वाक-सिद्धि’ प्राप्त होती है. 2026 में विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं और मानसिक तनाव के बीच ये नाम एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने का अचूक माध्यम हैं.
इन नामों के जाप के लाभ-
-स्मरण शक्ति: भूलने की बीमारी या याद न होने की समस्या दूर होती है.
-कला में निपुणता: संगीत, लेखन और गायन से जुड़े लोगों को सफलता मिलती है.
-वाणी दोष का निवारण: हकलाहट या स्पष्ट न बोल पाने वाले बच्चों के लिए इन नामों का जाप विशेष फलदायी है.


