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    पाकिस्तान प्रेम में डूबी बांग्लादेश की यूनुस सरकार फिर उठाएगी भारत विरोधी कदम

    ढाका। बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार पाकिस्तान के साथ लगातार रिश्ते मजबूत करने में जुटी है, वहीं पुराने दोस्त भारत के साथ दुश्मनी बढ़ रहे है। अब यूनुस सरकार एक ऐसा कदम उठाने की तैयारी कर रही है, जिसका सीधा असर भारत पर होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनुस सरकार बांग्लादेश में आयात होकर आने वाले सूती धागे पर कस्टम ड्यूटी लगाने वाली है। बांग्लादेश अपने सूती धागे का ज्यादातर आयात भारत से करता है, जो देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह ड्यूटी 10 से 20 प्रतिशत के बीच हो सकती है। बांग्लादेश को उम्मीद है कि कस्टम ड्यूटी लगाने से घरेलू कपास की कीमतों में गिरावट रुक सकती है।
    बांग्लादेश की यूनस सरकार इस समय मुश्किल में फंसी है। एक ओर टेक्सटाइल मिलों के भारी विरोध का सामना कर रही है, जिनका कहना है कि ड्यूटी फ्री आयात ने उन्हें बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। वहीं, कपड़ा निर्यातक चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी नई ड्यूटी देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगी।
    भारत बांग्लादेश को सूती धागे का सबसे बड़ा निर्यातक हैं। भारत ने 2025 में 3.57 अरब डॉलर मूल्य के सूती धागे का निर्यात किया था। बांग्लादेश इसका सबसे खरीदार था, जिसने कुल शिपमेंट का 45.9 प्रतिशत आयात किया। वहीं, बांग्लादेश के कुल आयात में भारतीय हिस्सा 82 प्रतिशत है। लेकिन बांग्लादेश में इसका विरोध हो   रहा हैं और कहा जा रहा है कि इससे घरेलू कपास उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि कीमतें लगातार गिर रही हैं।
    कपड़ा निर्यातक इस मुद्दे को अलग तरह से देख रहे हैं। निर्यातकों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर तैयार धागा बहुत महंगा है और गुणवत्ता में भी सही नहीं होता। बांग्लादेश प्रमुख टेक्सटाइल का निर्यातक और ग्लोबल ब्रांड भारतीय सप्लाई को पसंद करते हैं। बांग्लादेश में भारतीय धागे के आयात की यह बड़ी वजह है। एक्सपोर्टर को डर है कि आयात में किसी भी रुकावट से लागत बढ़ेगी, शिपमेंट में देरी होगी और अंत में इसका असर देश के ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट पर होगा।
    पिछले साल अप्रैल में यूनुस सरकार ने प्रमुख लैंडपोर्ट के माध्यम से भारत से धागा आयात करने की अनुमति देना बंद किया था। इसके पहले बांग्लादेश को भारत से होने वाले धागा निर्यात का 32 प्रतिशत जमीन के रास्ते होता था। हालांकि, इसके बाद भी घरेलू धागे की मांग में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।

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