शिव की नगरी उज्जैन मे हर पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इसी प्रकार देवों के देव महादेव को समर्पित महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत ही पवित्र और खास त्योहार है. यह दिन शिवभक्तों के लिए भक्ति, आस्था और साधना का विशेष अवसर होता है. वैसे तो शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है लेकिन फाल्गुन महीने की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है. इस शिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक होता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन रात भगवान शंकर शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे. शिवलिंग को सृष्टि और जीवन का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि पंचतत्व सहित पूरे ब्रह्मांड की ऊर्जा शिवलिंग में समाहित है. यही वजह है कि महाशिवरात्रि की रात की गई पूजा, व्रत और साधना बहुत फल देने वाली मानी जाती है. इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं. एक मान्यता यह भी है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसी कारण इस दिन कई स्थानों पर शिव बारात निकाली जाती है और शिवालयों में विशेष उत्सव मनाया जाता है. आइए उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते है शिवरात्रि का महत्व व चार प्रहर की पूजा का शुभ समय.
कब मनाई जायगी महाशिवरात्रि?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी. यह चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी दिन सोमवार को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी. ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी दिन रविवार को मनाई जाएगी. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत रखा जाएगा और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी.
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर में पूजा करने का बड़ा महत्व है. इसमें महाशिवरात्रि की शाम से पूजा प्रारंभ होती है और अगले दिन की सुबह तक में कुल 4 बार पूजा की जाती है. यानी कि रात के चारों प्रहर में शिव-पार्वती जी की पूजा की जाती है. इस साल महाशिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा के मुहूर्त ये हैं-


