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    प्रदीप जैन : संघर्ष, संकल्प, ईमानदारी से सफलता का भरोसेमंद नाम

    प्रदीप जैन सरकारी विभागों से लेकर देश की प्रख्यात निजी कंपनियों तक एक भरोसेमंद विशेषज्ञ
    राजेश रवि , मिशनसच न्यूज। अलवर शहर में यदि आकिटेक्ट और सर्वे ( वास्तु-निर्माण, सर्वेक्षण और तकनीकी परामर्श ) के क्षेत्र में किसी विश्वसनीय और प्रमुख नाम का उल्लेख किया जाए तो वह निस्संदेह प्रदीप जैन हैं। उनकी कार्यशैली, ईमानदारी और तकनीकी दक्षता ने उन्हें सरकारी विभागों से लेकर देश की प्रख्यात निजी कंपनियों तक एक भरोसेमंद विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है। आज उनका नाम अलवर ही नहीं, बल्कि राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक के इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वे और आर्किटेक्चर से जुड़े कामों में विशिष्ट पहचान रखता है। मगर यह सफलता उन्हें यूँ ही नहीं मिल गई  । इसके पीछे है संघर्ष, कठिन परिस्थितियों पर जीत, मजबूत इच्छाशक्ति और अपने काम के प्रति अटूट समर्पण।

    शुरुआती जीवन और शिक्षा: मजबूत नींव जिसने भविष्य गढ़ा
    वर्तमान में अलवर शहर की अंबेडकर कॉलोनी में निवास कर रहे प्रदीप जैन ने बचपन से ही पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा के प्रति रूचि दिखाई। प्रारंभिक शिक्षा अलवर के ही स्कूलों से पूरी की। आगे बढ़ने की इच्छा और इंजीनियरिंग की तरफ झुकाव ने उन्हें पिलानी की ओर प्रेरित किया, जहाँ उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
    तकनीकी विषयों की समझ, मेहनत और व्यावहारिक सोच ने उन्हें कॉलेज के समय से ही अलग पहचान दिलाई। पढ़ाई के बाद उनके लिए कई रास्ते खुले, मगर उन्होंने अपने क्षेत्र में निपुणता हासिल करने का निर्णय लिया।

    पहली प्राइवेट नौकरी और अनुभवों की मजबूत सीख
    शिक्षा पूरी होते ही प्रदीप जैन ने 1993 में राजस्थान स्टेट ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन में एक प्रोजेक्ट से अपने करियर की शुरुआत की। यह अनुभव उनके लिए एक बड़ी सीख था—व्यवहारिक इंजीनियरिंग, साइट मैनेजमेंट और तकनीकी व्यवहारिकता से उन्होंने यहीं परिचय पाया।
    1994 में उन्हें जयपुर स्थित सेंट प्लास्ट इंडिया लिमिटेड में मार्केटिंग जॉब का अवसर मिला। तकनीकी ज्ञान के साथ मार्केटिंग की समझ ने उन्हें व्यापक दृष्टिकोण दिया। 1997 तक वे इसी क्षेत्र में सक्रिय रहे। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन पारिवारिक परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि वे वापस अलवर लौट आए। यही वह मोड़ था जिसने उनके वास्तविक संघर्ष और वास्तविक उन्नति की शुरुआत की।
    अलवर में नई शुरुआत: चुनौतियों के बीच सफलता की खोज
    1998 में अलवर लौटकर उन्होंने अपने दो साथियों के साथ पुराने शहर के भैरू के चबूतरे के पास छोटी-सी शुरुआत की। शुरुआत आसान नहीं थी। पूँजी कम थी, इसलिए परिवार की सहायता लेनी पड़ी। इसी बीच यूआईटी द्वारा चौराहों के सौंदर्यीकरण और अन्य निर्माण संबंधी कार्य निजी एजेंसियों को दिए जा रहे थे। इन्हीं प्रोजेक्टों में से एक काम प्रदीप और उनके साथियों को मिला।
    काम पूरा किया गया, लेकिन जिस व्यापारी से भुगतान मिलना था, उसने भुगतान देने से ही इनकार कर दिया। यह घटना न सिर्फ आर्थिक झटका थी बल्कि भावनात्मक रूप से भी कठिन थी। साझेदारों के परिवारों ने भी आपत्तियाँ जताईं, जिससे दोनों साथी अलग हो गए। परिस्थितियाँ विकट थीं,परंतु हिम्मत अडिग।
    इन्हीं दिनों प्रदीप जैन ने अन्य दो साथियों के साथ मिलकर फिर से शुरुआत की। उनके शब्दों में—“बस इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।” यह टीम इतनी मजबूत बनी कि आज भी यह साथ है और लगातार तरक्की कर रही है।
    काम का विस्तार और तकनीकी विशेषज्ञता का प्रभाव
    अलवर में किए गए कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता ने उन्हें जल्द ही पहचान दिलाई। खास तौर पर उस समय के एक्सईएन अशोक गुप्ता ने उन्हें विशेष सहयोग दिया, जिसे प्रदीप आज भी सम्मानपूर्वक याद करते हैं।
    धीरे-धीरे उनका काम पीडब्ल्यूडी, रीको, यूआईटी और अन्य सरकारी संस्थाओं तक फैलता गया। सर्वेक्षण, नक्शे, निर्माण परियोजनाएँ, तकनीकी परामर्श, स्ट्रक्चर प्लान—वे हर कार्य में अपनी कुशलता साबित करते गए।
    आज अरिहंत बिल्ड कॉम नाम से उनकी स्थापित कंपनी राजस्थान के अलावा हरियाणा और दिल्ली में भी कई प्रोजेक्टों पर काम कर रही है। सरकारी परियोजनाओं के साथ-साथ वे अनेक प्रतिष्ठित निजी कंपनियों को भी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
    परिवार : मूल्यों, संस्कारों और प्रेरणा से भरा घर
    प्रदीप जैन के व्यक्तित्व के निर्माण में उनके परिवार की बड़ी भूमिका रही है। उनके पिता मूलचंद जी कानूनगो का निधन हो चुका है जबकि मां का आशीर्वाद उन्हें प्रतिदिन प्रेरणा देता है।
    चार भाइयों में प्रदीप तीसरे स्थान पर आते हैं। दो बड़े भाई अशोक एवं राजेन्द्र जयपुर में रहते हैं। अशोक जी जीवन बीमा निगम में वरिष्ठ मण्डल प्रबंधक पद, राजेंद्र जैन केनरा बैंक में रीजनल मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। छोटे भाई मनोज जैन “शुभ निवेश” इन्वेस्टमेंट’ नाम से निजी निवेश कंपनी अलवर में ही चलाते हैं।
    पत्नी प्रमिला जैन सरकारी सेवा में वरिष्ठ अध्यापिका हैं और परिवार को संबल और ऊर्जा प्रदान करती हैं। बड़ा पुत्र आयुष जैन ने बिट्स हैदराबाद से एमटेक पूरा किया और वर्तमान में सैमसंग में एसोसिएट इंजीनियर के पद पर बंग्लौर में कार्यरत है। दूसरा पुत्र किन्सुख जैन बिट्स पिलानी में कंप्यूटर साइंस में बीटेक और एसएससी की पढ़ाई कर रहा है।
    अलवर जैन समाज में सक्रिय भूमिका-
    प्रदीप जैन केवल अपने पेशे तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी उनका समर्पण उल्लेखनीय है। वे लंबे समय से चंद्रप्रभु विकलांग कल्याण समिति के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और दिव्यांगों की सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
    वे दिगंबर जैन मंदिर, मुंशी बाजार में उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और धार्मिक गतिविधियों में नियमित भाग लेते हैं।
    साथ ही वे पल्लीवाल जैन महासभा की जिला कार्यकारिणी में भी उपाध्यक्ष हैं, जहाँ समाज के विकास हेतु योजनाओं, कार्यक्रमों और सेवा कार्यों में सक्रिय योगदान देते हैं।
    विचारधारा के स्तर पर वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं, और यह जुड़ाव उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, राष्ट्रहित और सकारात्मक ऊर्जा को हमेशा बनाए रखता है।
    एक ऐसा जीवन, जो प्रेरित करता है
    प्रदीप जैन की यात्रा केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और दृढ़ता का वह उदाहरण है जो युवाओं को प्रेरित करता है। कई बार परिस्थितियाँ प्रतिकूल हुईं, कभी आर्थिक संकट आया, कभी सहयोगियों का साथ छूटा, पर प्रदीप जैन ने हर कठिनाई को अवसर में बदला। अपने कार्यक्षेत्र में विश्वसनीयता, गुणवत्ता और ईमानदारी को सर्वोपरि रखा।
    आज वे स्थापत्य और सर्वे के क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम हैं—एक ऐसा नाम जिसने अपने सपनों को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि उन्हें मेहनत और निरंतरता के साथ सच भी कर रहे हैं।

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