India Us Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को अमेरिका के साथ हुई इस डील को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया
मिशनसच न्यूज, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच 500 अरब डॉलर (करीब 45,29,069.80 करोड़ रुपये) के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक अंतरिम ढांचे (Interim Framework) पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का ऐतिहासिक अवसर भी प्रदान करता है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को अमेरिका के साथ हुई इस डील को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में बेहद अहम साबित होगा। गोयल के अनुसार, इस अंतरिम ढांचे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के निर्यातकों के लिए यह एक असाधारण अवसर है, क्योंकि 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब उनके लिए “मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी” के साथ खुल रही है। इससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार देर रात भारत और अमेरिका के बीच जो संयुक्त बयान तय हुआ और जिसे दुनिया के सामने रखा गया, उसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक स्वागत किया गया है।
इस अंतरिम ढांचे के तहत दोनों देशों ने यह सहमति जताई है कि वे व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करेंगे। विशेष रूप से भारतीय एमएसएमई सेक्टर, कृषि उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाओं और इंजीनियरिंग गुड्स को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी स्थिरता प्रदान करेगी। भारत, जो तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है, अमेरिका के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आ रहा है।
सरकार का कहना है कि यह अंतरिम ढांचा भविष्य में एक व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) या दीर्घकालिक व्यापार समझौते की नींव भी बन सकता है। फिलहाल इसका उद्देश्य उन मुद्दों पर सहमति बनाना है, जिन पर तत्काल प्रगति संभव है, ताकि व्यापार का प्रवाह तेज किया जा सके और दोनों देशों के व्यवसायों को त्वरित लाभ मिल सके।
पीयूष गोयल ने यह भी रेखांकित किया कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक विनिर्माण और निर्यात हब बनने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका के साथ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका व्यापार 500 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार कर सकता है।
कुल मिलाकर, भारत और अमेरिका के बीच यह अंतरिम व्यापारिक सहमति दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास और साझेदारी की नई मिसाल है। इससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और प्रभाव भी मजबूत होगा।
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