दिल्ली के लिटिल बर्ड प्रकाशन से प्रकाशित काव्य कथा संग्रह पर साहित्यकारों ने की विस्तृत समीक्षा, अलवर में जुटे रचनाकार
अलवर। वरिष्ठ फिल्मकार एवं साहित्यकार राजेन्द्र शर्मा के काव्य कथा संग्रह ‘शब्द चित्र कथाएँ’ का लोकार्पण समारोह रविवार को शहर के मधुवन मैरिज गार्डन सभागार में सृजक संस्थान के तत्वावधान में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। दिल्ली के ख्यात लिटिल बर्ड प्रकाशन से प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन अवसर पर साहित्य, संस्कृति और संवेदना से जुड़े अनेक रचनाकारों ने भाग लिया।

समारोह में मुख्य अतिथि वरिष्ठ समीक्षक डॉ. जीवन सिंह मानवी ने कहा कि “जिसके मन में करुणा नहीं होती, वह मनुष्य नहीं हो सकता। राजेन्द्र शर्मा की कविताओं में करुणा का विस्तार स्पष्ट दिखाई देता है। संस्कृति से रिक्त किसी भी शहर का कोई अर्थ नहीं होता।” उन्होंने पुस्तक को मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. शंभू गुप्त एवं लोकेश तिवाड़ी ने पुस्तक की विभिन्न आयामों से गहन समीक्षा करते हुए इसे समकालीन कविता की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। वहीं नीदरलैंड से पधारे साझा संसार फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं हिंदी सेवी डॉ. रामा तक्षक ने रचनाओं की भाषा, शैली और कहन की विशिष्टता को रेखांकित किया।
युवा कवि प्रेम शर्मा ने चर्चा के दौरान कहा कि संग्रह की अधिकांश कविताएं स्त्री संवेदना और करुणा को केंद्र में रखती हैं, जो पाठकों को भीतर तक स्पर्श करती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी निर्वाण बोधिसत्व ने कवि राजेन्द्र शर्मा को “जमीन से जुड़े कवि” की संज्ञा दी।
समारोह की शुरुआत सरस्वती प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं रामचरण ‘राग’ द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। सृजक संस्थान के उपाध्यक्ष खेमेन्द्र सिंह चंद्रावत ने संस्था का परिचय देते हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सचिव रामचरण ‘राग’ ने किया तथा अंत में रेणु मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर शिक्षाविद छंगाराम मीणा, नीलाभ पंडित, डॉ. योगमाया सैनी, एडवोकेट हरिशंकर गोयल, डॉ. अंजना अनिल सहित अनेक साहित्यकारों ने कृतिकार को बधाई दी। कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि रघुवर दयाल जैन, गिरवर सिंह बाँकावत, डॉ. शिवचरण चैड़वाल, डॉ. वेद प्रकाश यादव, महेश वेदामृत, नरेन्द्र शर्मा, अनिल कौशिक, भरत सिंह अहरोदिया, प्रदीप माथुर, मुकेश मीणा, हेमराज सैनी, कुलदीप सिंह अहरोदिया, कवयित्री नीलिमा कालरा, मधु यादव, महावीर सिंहल, बी.डी. गुप्ता, संजीव कालरा, डॉ. सर्वेश जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
लोकार्पण समारोह ने अलवर की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की तथा रचनात्मक विमर्श का सशक्त मंच साबित हुआ।
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