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    शिव कथा में समर्पण का संदेश, साधक बोले – अर्पण नहीं, सच्चा समर्पण दिलाता है भगवान की कृपा

    शालीमार मंदिर में शिव-पार्वती विवाह रस्मों के साथ भक्तों ने लिया आनंद, दिव्य दरबार में सुनी गई पीड़ितों की व्यथा

    अलवर अपना घर शालीमार स्थित श्रीराम मंदिर में आयोजित शिव कथा के पंचम दिवस शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक डॉ शिवम् साधक ने कहा कि यदि भगवान शिव की कृपा पानी है तो अर्पण से अधिक समर्पण की भावना जरूरी है। भगवान वस्तुओं से नहीं, बल्कि सच्चे मन और समर्पण भाव से शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

    उन्होंने प्रवचन में कहा कि मनुष्य यदि अपना मन भगवान को अर्पित कर दे तो वही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। अपने अहंकार और इच्छाओं को त्यागकर ईश्वर की इच्छा में स्वयं को समाहित करना ही सच्ची भक्ति है। उनके विचारों से उपस्थित भक्त भावुक हो उठे।

    कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की हल्दी व लग्न रस्मों का मंचन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने झूमते हुए भाग लिया। विशेष रूप से एक विवाह योग्य कन्या की भी पारंपरिक रस्में करवाई गईं, जिससे माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया। शाम को आयोजित दिव्य चंदन दरबार में महाराज ने पीड़ित श्रद्धालुओं की समस्याएं सुनकर समाधान का मार्ग बताया।

    कार्यक्रम संयोजक एस सी मित्तल ने बताया कि यह शिव कृपा आनंद महोत्सव ब्रह्मलीन संत शिवानन्द साधक की प्रेरणा से आयोजित किया जा रहा है। कथा 8 फरवरी से प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक चल रही है, जो 15 फरवरी तक जारी रहेगी।

    आगामी कार्यक्रमों में हिंडोला उत्सव, भजन संध्या, 108 विशेष रुद्राभिषेक, ज्योतिर्लिंग पूजन और शिव बारात यात्रा का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजकों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से भाग लेकर शिव कृपा का लाभ उठाने की अपील की है।

    आज की कथा के यजमानों में मदनलाल गुप्ता, डॉ. एस.सी. मित्तल, अल्का मित्तल, राकेश गोयल, संदीप अग्रवाल, भावना अग्रवाल, राजेश शर्मा, पूजा शर्मा, सुभाष मित्तल, अनिल बंसल और गिरीश गुप्ता सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।

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