शिक्षकों के तबादलो पर टाइम-लाइन मांगते हुए सदन में उठाए सवाल, मंत्री नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को तृतीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला नीति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार को चुनावी वादों की याद दिलाते हुए शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट नीति और समय-सीमा तय करने की मांग की।
सदन की कार्यवाही के दौरान जूली ने कहा कि सरकार का आधे से अधिक कार्यकाल बीत चुका है, लेकिन अब तक तबादला नीति तैयार नहीं हो सकी है। उन्होंने सीधे सवाल करते हुए पूछा कि आखिर शिक्षकों के ट्रांसफर कब तक होंगे और क्या सरकार कोई निश्चित टाइम-लाइन दे सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों शिक्षक अनिश्चितता में हैं और सरकार उन्हें गुमराह कर रही है।
इस दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पिछली सरकारों के आंकड़े गिनाते हुए भाजपा कार्यकाल में हुए तबादलों का हवाला दिया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने इसे ‘पुरानी बात’ बताते हुए कहा कि मुद्दा वर्तमान सरकार की जिम्मेदारी और घोषणा पत्र के वादों का है।
जूली ने कहा कि जब सरकार ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट नीति बनाने का वादा किया था तो अब देरी क्यों हो रही है। उन्होंने इसे शिक्षकों के हितों के साथ खिलवाड़ करार दिया।
चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री कोई स्पष्ट जवाब या समय-सीमा देने में असफल रहे, जिसके चलते सदन की स्थिति असहज हो गई और अध्यक्ष को अगले प्रश्न की ओर बढ़ना पड़ा। विपक्ष ने इसे सरकार की वादाखिलाफी बताते हुए शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि प्रदेश भर के शिक्षक लंबे समय से तबादला नीति लागू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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