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    Homeलॉर्ड्स यूनिवर्सिटी में “माई चॉइस–माई राइट” विषय पर कार्यक्रम हुआ

    लॉर्ड्स यूनिवर्सिटी में “माई चॉइस–माई राइट” विषय पर कार्यक्रम हुआ

    लॉर्ड्स यूनिवर्सिटी : युवाओं से समतामूलक समाज निर्माण में भागीदारी का आह्वान

    अलवर। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रांतीय कोषाध्यक्ष रईसा ने सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट, लॉर्ड्स यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में “माई चॉइस–माई राइट” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में युवाओं, विशेषकर युवतियों, को जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की पूरी स्वतंत्रता नहीं मिल पाती।

    रईसा ने कहा कि हम एक पुरुष प्रधान सामाजिक व्यवस्था में रह रहे हैं, जहां शिक्षा, कैरियर और विवाह जैसे विषयों पर अधिकांश निर्णय परिवार और समाज द्वारा लिए जाते हैं। लड़कियों पर यह पाबंदियां अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। उन्हें अपनी पसंद का कैरियर चुनने, अपनी कमाई को अपनी इच्छा अनुसार खर्च करने और अपनी पसंद से विवाह करने की स्वतंत्रता प्रायः नहीं मिलती।

    उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में राजस्थान में उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन बढ़कर 7.25 लाख हो गया है, जबकि छात्रों का आंकड़ा 5.86 लाख है। यह सकारात्मक बदलाव का संकेत है, लेकिन इसका असर रोजगार के अवसरों में समान रूप से दिखाई नहीं देता। समाज में आज भी लड़कियों के लिए “अच्छा रिश्ता” कर विवाह करना प्राथमिकता माना जाता है, जिसके कारण उनका कैरियर प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब भी लगभग 25 प्रतिशत बाल विवाह होने की स्थिति चिंता का विषय है।

    रईसा ने यह भी कहा कि जो युवक-युवतियां अपनी पसंद से विवाह करना चाहते हैं, उन्हें कई बार रोका जाता है। यहां तक कि तथाकथित ‘इज्जत’ के नाम पर हिंसा और हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। उन्होंने इसे सामाजिक मानसिकता की गंभीर समस्या बताया।

    कन्या भ्रूण हत्या को उन्होंने एक छिपी हुई लेकिन निरंतर बनी रहने वाली समस्या बताया। आधिकारिक तौर पर दर्ज मामलों की संख्या कम दिखाई देती है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक गंभीर है। इसी प्रकार घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं अक्सर शिकायत दर्ज नहीं करातीं और चुपचाप अत्याचार सहती रहती हैं।

    अपने संबोधन के अंत में रईसा ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने कैरियर के साथ-साथ एक जागरूक नागरिक के रूप में समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं को ऐसा समाज बनाने में योगदान देना चाहिए जो अधिक समतामूलक, न्यायपूर्ण और समावेशी हो। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी विषय पर चर्चा करते हुए सक्रिय भागीदारी निभाई।

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