घर में बिखरी हुई या उल्टी पड़ी चप्पल देखकर अक्सर बड़े लोग तुरंत टोका करते हैं- “इसे सीधा रखो, नहीं तो घर में क्लेश होता है.” कई लोग इसे सिर्फ परंपरागत मान्यता मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ इसे वास्तु दोष से जोड़ते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस मान्यता के पीछे केवल अंधविश्वास ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हो सकते हैं. सवाल यह नहीं है कि चप्पल उल्टी रहने से सीधे झगड़ा हो जाएगा, बल्कि यह है कि घर की अव्यवस्था हमारे मन और माहौल को किस हद तक प्रभावित करती है.
भारतीय परंपरा में घर को केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि ऊर्जा का केंद्र माना गया है. कहा जाता है कि जिस घर में प्रवेश द्वार साफ और व्यवस्थित हो, वहां सकारात्मकता बनी रहती है. जूते-चप्पल बाहर की धूल, गंदगी और नकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं. अगर ये इधर-उधर बिखरे या उल्टे पड़े हों, तो यह गड़बड़ी का संकेत देता है. पुराने लोगों का मानना है कि ऐसे दिखने से मन में असहजता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. जब व्यक्ति पहले से ही तनाव में हो, तो छोटी-सी बात भी बहस का कारण बन सकती है. लोगों का मानना है कि घर में चीजें बिखरी होने से यह घर के वातावरण को प्रभावित कर सकता है.
मनोविज्ञान भी इस बात का समर्थन करता है कि गंदगी और बिखराव दिमाग पर नकारात्मक असर डालते हैं. जब घर में प्रवेश करते ही जूते-चप्पल उल्टे-सीधे दिखें, तो अवचेतन मन (Subconscious Mind) उसे असंतुलन के रूप में दर्ज करता है. धीरे-धीरे यह असंतुलन व्यवहार में झलक सकता है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि केवल उल्टी चप्पल ही झगड़े की वजह बनती है, लेकिन यह जरूर माना जाता है कि व्यवस्थित घर में रहने वाले लोगों का मानसिक संतुलन बेहतर रहता है.
वास्तु के दृष्टिकोण से जूते-चप्पल को मुख्य दरवाजे के ठीक सामने नहीं रखना चाहिए. इन्हें हमेशा एक साइड में या शू-रैक में सलीके से रखना बेहतर माना जाता है. मंदिर, रसोई या घर के बीचों-बीच चप्पल रखना अनुचित समझा जाता है. माना जाता है कि प्रवेश द्वार जितना साफ और व्यवस्थित होगा, उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवाहित होगी.
यह समझना जरूरी है कि चप्पल उल्टी रहना अपने आप में किसी झगड़े का कारण नहीं, बल्कि यह अनुशासन और स्वच्छता की आदत से जुड़ा विषय है. जब घर साफ-सुथरा और सलीके से सजा हो, तो मन भी शांत रहता है. इसलिए इसे अंधविश्वास मानकर टालने के बजाय एक अच्छी आदत के रूप में अपनाना ज्यादा समझदारी हो सकती है.


