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    Homeदुनियाहसीना का प्रत्यर्पण............दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा

    हसीना का प्रत्यर्पण…………दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा

    ढाका। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के करीब डेढ़ साल बाद देश को आज नया प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रुप में मिल गया। इसके साथ ही बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत हो गई। जहां मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश ने खुलकर भारत विरोधी स्टैंड अपनाया, वहीं बीएनपी ने सत्ता में वापसी से पहले अच्छे संकेत दिए हैं। बीएनपी ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है। वहीं पार्टी के सेक्रेटरी जनरल ने हाल ही में एक बयान में साफ किया है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला दोनों देशों के रिश्तों में खटास की वजह नहीं बनेगा।
    बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सेक्रेटरी जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने शपथ ग्रहण से ठीक पहले यह बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश कानूनी तरीकों से हसीना के प्रत्यर्पण की कोशिश करता रहेगा, लेकिन मुद्दे की वजह से भारत के साथ सहयोग को पटरी से नहीं उतरने देगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में देश में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद से भारत में ही रह रही हैं। बांग्लादेश में उन्हें भगौड़ा और हत्यारा घोषित किया है।
    आलमगीर ने बताया, “हमारा मानना ​​है कि पूर्व पीएम हसीना ने सच में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन किया हैं। उन्हें सजा देने की मांग है। हमारा मानना ​​है कि भारत को उन्हें हमें सौंप देना चाहिए। लेकिन हसीना को बांग्लादेश को ना सौंपना भारत के साथ हमारे रिश्तों में रुकावट नहीं डालेगा। हम और भी बेहतर रिश्ते बनाना चाहते हैं।”
    इस दौरान फखरुल ने माना कि दोनों देशों में मतभेद ज़रूर हैं लेकिन उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका और चीन के रिश्तों में कई मुश्किलें हैं, फिर भी वे एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। हमें भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सिर्फ एक मुद्दे पर नहीं अटकना चाहिए।”
    वहीं बांग्लादेशी नेताओं की तरफ से हो रही भड़काऊ बयानबाजियों को भी उन्होंने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ युद्ध नहीं लड़ सकते। हमें बात करने की जरूरत है। जो लोग भारत से लड़ने की बात करते हैं, वे पागलों की तरह बोल रहे हैं।” इसके अलावा उन्होंने गंगा जल संधि जैसे मुद्दों को भी अहम माना। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक जुड़ाव की जरूरत होगी।

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