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    टीम इंडिया की लुटिया डूबो कर ही मानेंगे गौतम गंभीर! हार के सबसे बड़े कसूरवार, प्लानिंग की चूक या जिद का खेल?

    जिस तरह मुंबई-गुरुग्राम जैसी मेट्रो सिटीज की सारी चकाचौंध एक बारिश होते ही बदबूदार नालों में डूब जाती है ठीक उसी तरह टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में एक हार ने भी टीम इंडिया की पोल खोलकर रख दी है. साउथ अफ्रीका के हाथों मिली 76 रन की शर्मनाक हार में जितना कसूर खिलाड़ियों के घटिया प्रदर्शन का है, उतनी ही गलती गौतम गंभीर की बेकार प्लानिंग की है. हेड कोच गंभीर इस हार के सबसे बड़े कसूरवार हैं. आज अगर भारत इस एक हार के साथ वर्ल्ड कप से बाहर होने की कगार पर पहुंच चुका है तो इसका सारा ठिकरा गंभीर की अजीबोगरीब रणनीति पर ही फोड़ना चाहिए|

    सिर्फ मैदान नहीं दिमाग में भी खेला जाता क्रिकेट

    वैसे भी क्रिकेट सिर्फ मैदान पर नहीं खेला जाता बल्कि उससे कहीं ज्यादा दिमाग में खेला जाता है. टीम मैनेजमेंट यही सबसे बड़ी चूक कर बैठा है. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बीती रात भारतीय बैटिंग यूनिट पूरी तरह एक्सपोज हो गई. ग्रुप स्टेज में चार जीत ने इस कमजोरी पर पर्दा डाला हुआ था, लेकिन स्लो और काली मिट्टी के विकेट पर जब बल्लेबाजों का असल इम्तिहान शुरू हुआ तो सबने घुटने टेक दिए. फिंगर स्पिनर्स के खिलाफ भारत की कमजोरी एक बार फिर दुनिया ने देख ली|

    खराब प्लानिंग, घटिया क्रियांवयन

    न तो भारतीय टीम मैनेजमेंट की प्लानिंग में स्पष्टता है और न उसके क्रियांवयन में. अब इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि पिछली चैंपियन टीम के लिए ओपन कौन करेगा, ये टूर्नामेंट से पहले तक पता नहीं था. शुभमन गिल को अचानक वर्ल्ड कप टीम से ड्रॉप करना. श्रेयस अय्यर को स्क्वॉड में शामिल नहीं करने के चलते गंभीर और चयनकर्ता पहले ही सवालों के घेरे में रहे हैं|

    गलत वक्त पर पैनिक बटन दब गया!

    गौतम गंभीर अपने सबसे बेहतरीन 11 खिलाड़ी उतारने की बजाय लगातार प्रयोग कर रहे हैं. भारत ऐसे समय प्रयोग कर रहा है, जब उसे बिलकुल भी पैनिक नहीं होना है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ लोकल ब्वॉय अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से निकालकर वाशिंगटन सुंदर को खिलाने का दाव भी समझ से परे था|खराब दूरदर्शी व्यक्ति कभी सफल रणनीतिकार नहीं बन सकता. भारत अगर 2011 वर्ल्ड कप जीता तो प्रयोग 2008 से शुरू हो चुके थे. 2015 वर्ल्ड कप के लिए एक्सपेरिमेंट 2012 से ही करनी पड़ी थी. तब कहीं जाकर टूर्नामेंट से पहले टीम तैयार होती है. वर्ल्ड कप से चंद घंटे पहले तक अगर खिलाड़ी यही सोचते रहे कि वह टीम में सिलेक्ट होंगे या नहीं तो फिर तैयारी के साथ आत्मविश्वास की कमी भी दिखेगी और वही होगा जो साउथ अफ्रीका के खिलाफ बीती रात हुआ|

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