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    Homeधर्म-समाजपूजा का टीका क्यों है इतना महत्वपूर्ण? शास्त्रों में छिपा है रहस्य

    पूजा का टीका क्यों है इतना महत्वपूर्ण? शास्त्रों में छिपा है रहस्य

    भारतीय शास्त्रों और आध्यात्मिक परंपराओं में टीका या तिलक का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है. इसे केवल सजावट या परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा, आस्था और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. तिलक लगाने का स्थान, आज्ञा चक्र (दो भौंहों के बीच का भाग), योग और तंत्रशास्त्र में अत्यंत शक्तिशाली माना गया है.

    1. आज्ञा चक्र को सक्रिय करता है

    शास्त्रों में कहा गया है कि तिलक लगाने से मन स्थिर होता है, विचारों में स्पष्टता आती है और ध्यान शक्ति बढ़ती है. आज्ञा चक्र आत्मबोध और जागरूकता का केंद्र माना गया है.

    2. सकारात्मक ऊर्जा का संरक्षण

    तिलक माथे पर सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है. माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और शरीर की ऊष्मा को संतुलित रखता है.

    3. पुण्य और शुभता का प्रतीक

    पूजा के बाद तिलक लगाना शुभ माना जाता है. यह दर्शाता है कि व्यक्ति ईश्वर के संपर्क में आया है और उसके संरक्षण में है.

    4. मन और आत्मा का शुद्धिकरण

    चंदन, हल्दी, रोली या भस्म, इन सबका अपना आध्यात्मिक और औषधीय महत्व है. इनके स्पर्श से मन शांत और आत्मा शुद्ध मानी जाती है.

    5. पहचान और धर्म का संकेत

    देवताओं और आस्तिकों की पहचान भी तिलक से की जाती रही है. शैव, वैष्णव और शाक्त परंपराओं में अलग-अलग तिलक उसकी विशिष्टता दर्शाते हैं.

    कैसा होना चाहिए आपका पूजा का टीका?
    1. चंदन का तिलक – शीतलता और शांति
    चंदन का तिलक मन को शांत करता है और ऊर्जा को संतुलित रखता है. ध्यान, पूजा और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
    किसके लिए: सभी आयु वर्ग, ध्यान करने वाले, मानसिक तनाव वाले.

    2. रोली/कुमकुम का तिलक – शक्ति और शुभता
    रोली से बना लाल तिलक मंगल और शक्ति का प्रतीक है. पूजा में इसे सबसे शुभ माना जाता है.
    किसके लिए: देवी-देवता की पूजा, हवन या मंगल कार्य.

    3. हल्दी का तिलक – पवित्रता और आरोग्य
    हल्दी को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है. यह शरीर में रोग प्रतिरोधकता बढ़ाती है.
    किसके लिए: आरती, घर की पूजा, सुबह के तिलक.

    4. भस्म का तिलक – वैराग्य और सुरक्षा
    त्रिपुंड भस्म तिलक विशेष रूप से शैव संप्रदाय में लगाया जाता है. यह अहंकार को नष्ट करने और आत्मज्ञान को बढ़ाने का प्रतीक है.

    5. चावल (अक्षत) के साथ तिलक – पूर्णता और आशीर्वाद
    तिलक के ऊपर अक्षत लगाने से यह और शुभ माना जाता है. यह पूर्णता और स्थिरता का प्रतीक है.

    शास्त्रों के अनुसार तिलक सिर्फ धार्मिक चिह्न नहीं, बल्कि ऊर्जा–संतुलन, सुरक्षा, शुभता और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है. पूजा करते समय चंदन, रोली या हल्दी का तिलक अपने स्वभाव और आवश्यकता अनुसार चुनें, आपका तिलक आपका आध्यात्मिक परिचय भी होता है.

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