हनुमानगढ़ में आयोजित हुआ अन्नदाता से अन्नपूर्णा कार्यक्रम
हनुमानगढ़। एस.के.डी. विश्वविद्यालय हनुमानगढ़ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय “अन्नदाता से अन्नपूर्णा एग्रोटेक समारोह” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित इस समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों तथा ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों और कृषि आधारित उद्यमों से जोड़ना था, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके।
समारोह के मुख्य वक्ता पर्यावरणविद् प्रोफेसर एम.पी.एस. चंद्रावत ने “कृषि के आधुनिकीकरण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था” विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उद्यमिता का सशक्त माध्यम बन सकती है। यदि कृषि आधारित उद्योगों और उत्पादों का समुचित प्रबंधन किया जाए तो न केवल कृषि उत्पादकता में वृद्धि संभव है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, लाभप्रदता में बढ़ोतरी और लागत में कमी (लो कॉस्ट मॉडल) भी सुनिश्चित की जा सकती है।
प्रो. चंद्रावत ने जोर देकर कहा कि आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप इरिगेशन, जैविक खेती, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और डिजिटल मार्केटिंग को अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना करने की दिशा में ठोस कदम उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि आधारित स्टार्टअप्स, डेयरी, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोल सकती हैं। इससे ग्रामीण पलायन पर भी रोक लगेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर लौटना समय की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित किया जा सकता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी होगा।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी कृषि नवाचार, एग्री-टेक्नोलॉजी और ग्रामीण विकास से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत किए। कई विद्यार्थियों ने कृषि क्षेत्र में शोध एवं स्टार्टअप की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं, ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय स्तर पर किसानों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रकार के आयोजन को ग्रामीण समाज के लिए उपयोगी पहल बताया।
तीन दिनों तक चले इस एग्रोटेक समारोह में विभिन्न तकनीकी सत्र, विचार-विमर्श और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने कृषि के समग्र विकास पर चर्चा की। समापन समारोह में आयोजकों द्वारा प्रोफेसर एमपीएस चंद्रावत को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल किसानों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के समग्र विकास की दिशा में एक सार्थक पहल भी माना जा रहा है। कार्यक्रम में प्रो. सौमन दत्ता, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (वनस्पति विज्ञान विभाग), University of Rajasthan, जयपुर ने भी भाग लिया।
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