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    Homeराजनीतिनितिन नबीन बिहार से चुनावी मैदान में उतरेंगे

    नितिन नबीन बिहार से चुनावी मैदान में उतरेंगे

    नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 9 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में सबसे पहला और चर्चित नाम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का है, जिन्हें बिहार से मैदान में उतारा गया है.

    इस फैसले के पीछे पार्टी की सबसे प्रमुख रणनीतिक कदम नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा भेजना है. क्योंकि पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवीन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय बहस, नीति-निर्माण और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.

    चुनाव आयोग ने 16 मार्च को ही 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की है, जिसमें भाजपा को अपने गठबंधन और सत्ताधारी राज्यों की वजह से मजबूत स्थिति हासिल होने की उम्मीद है. उम्मीदवारों की पूरी सूची इस प्रकार है

    • नितिन नबीन (बिहार)
    • शिवेश कुमार (बिहार)
    • तेराश गोवाल्ला (असम)
    • जोगेन मोहन (असम)
    • लक्ष्मी वर्मा (छत्तीसगढ़)
    • संजय भाटिया (हरियाणा)
    • मनमोहन सामल (ओडिशा)
    • सुजीत कुमार (ओडिशा)
    • राहुल सिन्हा (पश्चिम बंगाल)

    भाजपा ने इन नामों को उन राज्यों से चुना है जहां पार्टी या एनडीए गठबंधन विधानसभा में मजबूत स्थिति में है. बिहार से दो उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ाना चाहती है. पार्टी की इस फैसले के पीछे आखिर रणनीति क्या है ,यदि देखें तो इस फैसले के पीछे कई बातें पार्टी सूत्रों के माध्यम से बताई जा रहीं हैं.

    पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे मुख्य वजह और सबसे बड़ा कदम नितिन नविन को बिहार से राज्यसभा भेजना बताया जा रहा है. पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवींन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय कार्यों, और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.

    यदि देखा जाए तो बिहार में आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता की सीट खाली हो रही है और एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है, इसलिए मजबूत उम्मीदवार के जरिए यह सीट आसानी से जीती जा सकती है।दूसरी रणनीति क्षेत्रीय संतुलन बनाने की है. असम और छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित राज्यों से स्थानीय चेहरों को जगह देकर पार्टी संगठन को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है.

    इसी तरह ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी उम्मीदवार उतारकर भाजपा विपक्षी राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है. हरियाणा से संजय भाटिया जैसे अनुभवी नेता को शामिल कर अनुभव का लाभ उठाने की योजना है. विशेष रूप से महिलाओं में लक्ष्मी वर्मा और बाकी स्थिति स्थानीय, जनजातीय और क्षेत्रीय नेताओं को जगह देकर भाजपा सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है.

    कुल मिलाकर देखा जाए तो यह सूची भाजपा की उस व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है जिसमें 2026 के राज्यसभा चुनावों के जरिए ऊपरी सदन में अपनी ताकत बढ़ाई जाए, ताकि केंद्र में मोदी सरकार की नीतियों को और मजबूती मिल सके.

    भाजपा सूत्रों के मुताबिक, यह पहली सूची है और शेष नामों की घोषणा जल्द की जाएगी। राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष होते हैं, इसलिए विधायकों के समर्थन पर सब कुछ निर्भर करेगा. लेकिन एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए भाजपा इन 9 में से अधिकांश सीटें जीतने का भरोसा जता रही है.

    इस मुद्दे पर नाम ना लेने की शर्त पर भाजपा के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता का कहना है कि यह फैसला पार्टी का संगठनात्मक सोच का फैसला ,उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से शीर्ष नेतृत्व को सभी फैसलों में सम्मिलित करती है और अभी पार्टी अध्यक्ष संसद के सदस्य नहीं है इसलिए संसदीय प्रणाली में उन्हें शामिल करना आवश्यक था इसलिए पार्टी ने ये फैसला लिया. साथ ही उन्होंने 9 की 9 सभी सीटें जीतने का भी दावा किया और फैसले को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी का भी संकेत बताया.

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