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    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और गैस सप्लाई पर कड़ी निगरानी

    पेट्रोल-डीजल और एलपीजी स्टॉक की रोजाना होगी मॉनिटरिंग, कलेक्टर को भेजनी होगी रिपोर्ट

    इंदौर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात के चलते मध्य प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। गुरुवार से राज्य में पेट्रोलियम कंपनियों और गैस एजेंसियों के स्टॉक की मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है।

    राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार अब पेट्रोलियम वितरण एजेंसियों और गैस डिपो से जुड़ी कंपनियों को प्रतिदिन अपने स्टॉक और खपत की जानकारी जिला कलेक्टर को देनी होगी। इसके बाद यह रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाएगी।

    कलेक्टर को रोज भेजनी होगी स्टॉक रिपोर्ट

    अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की उपलब्धता की समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद राजधानी भोपाल में खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव खाद्य रश्मि अरुण शमी और विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इंदौर सहित पश्चिम मध्य प्रदेश के सभी पेट्रोलियम डीलरों और गैस एजेंसियों को अपने स्टॉक की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही रोजाना स्टॉक और खपत का पूरा ब्यौरा संभाग आयुक्त और जिला कलेक्टरों को भेजना अनिवार्य किया गया है।

    कालाबाजारी और जमाखोरी पर रहेगी नजर

    सरकार ने तेल कंपनियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी न होने पाए। इसके लिए कलेक्टर स्तर के साथ-साथ डीलर स्तर पर भी रोजाना स्टॉक की समीक्षा की जाएगी।

    राज्य में रोजाना भारी खपत

    मध्य प्रदेश में प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। वहीं 2022 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में रोजाना करीब 2.3 लाख एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग होता है। हालांकि खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग का कहना है कि फिलहाल राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई पर खतरा

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

    भारत अपने कच्चे तेल, एलएनजी, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल की बड़ी मात्रा के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर करता है। ऐसे में सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट का असर ईंधन कीमतों, खेती की लागत, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात उद्योगों पर पड़ सकता है।

    GTRI रिपोर्ट में भी जताई गई चिंता

    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल और गैस सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ गया है। 1 से 3 मार्च के बीच सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों को भी निशाना बनाया गया।

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